आखिर क्यों मेघनाथ को सिर्फ लक्ष्मण ही मार सकते थे ?

आखिर क्यों मेघनाथ को सिर्फ लक्ष्मण ही मार सकते थे ?

रामायण में बहुत सारी घटनाएं घटी जिसका कहीं न कहीं जिक्र हुआ है, लेकिन कुछ घटनाएं ऐसी है कि उसके बारे में कहीं जिक्र नहीं हुआ या ये घटनाएं रामायण से थोड़ा पहले ही घट चुकी थी. मेघनाथ रावण का बड़ा पुत्र था, उसने इंद्र को भी जीत रखा था इसलिए उसको इंद्रजीत भी कहा जाता था. और वह बहुत ही पराक्रमी एवं बहादुर योद्धा था |

अपने पिता की आज्ञा अनुसार इन्द्रजीत (मेघनाथ) बाकी के राज्यों को भी अपने कब्जे में लेने के उद्देश्य से यात्रा आरम्भ किया और पाताल लोक तक पंहुचा | इंद्रजीत को पाताल लोक में देख कर शेषनाग ने इंद्रजीत को फटकार लगाते हुए आने का कारण पूछा तो इन्द्रजीत ने बताया कि मैं पाताल लोक लेने के उद्देश्य से आया हूँ | शेषनाग इन्द्रजीत के वचनों को सुनकर क्रोधित हुए और युद्ध के लिए चुनौती दी फिर दोनों के बीच में भीषण युद्ध हुआ और अंततः इंद्रजीत ने शेषनाग को परास्त कर दिया | शेषनाग की एक पुत्री भी थी जिस से मेघनाथ प्रेम करता था उसे अपने साथ लेकर जाने लगा और उसी वक्त शेषनाग ने इंद्रजीत को मारने की प्रतिज्ञा ली |

इंद्रजीत ने कहा की मुझे कोई नहीं मार सकता, मुझे वही मार सकता है जो 14 वर्षो तक सोया न हो और साथ में ब्रह्मचर्य का भी पालन किया हो | अपने अगले जन्म में शेषनाग ने ही लक्ष्मण के रूप में जन्म लिया और 14 वर्षों तक वन में रहते हुए अपने भ्राता श्री राम की सेवा की और कभी सोये नहीं और चुकि पत्नी से दूर रहते हुए उन्होंने ब्रह्मचर्य का भी पालन की थी अतः इन्द्रजीत को शेषनाग के अवतार लक्षमन ही मार सकते थे |