आखिर क्यों कौरवों के पिता ने अपनी ही पत्नी के पूरे परिवार को मरवा दिया था ?

आखिर क्यों कौरवों के पिता ने अपनी ही पत्नी के पूरे परिवार को मरवा दिया था ?

1.गांधारी के साथ धोखा 

भीष्म ने धृतराष्ट्र का विवाह गांधार की राजकुमारी गांधारी से कर दिया। गांधारी को जब यह पता चला कि मेरे पति अंधा है तो उसने भी आंखों पर पट्टी बांध ली। गांधारी का विवाह धृतराष्ट्र से करने से पहले ज्योतिषियों ने सलाह दी कि गांधारी के पहले विवाह पर संकट है अत: इसका पहला विवाह किसी ओर से कर दीजिए, फिर धृतराष्ट्र से करें। इसके लिए ज्योतिषियों के कहने पर गांधारी का विवाह एक बकरे से करवाया गया था। बाद में उस बकरे की बलि दे दी गई। कहा जाता है कि गांधारी को किसी प्रकार के प्रकोप से मुक्त करवाने के लिए ही ज्योतिषियों ने यह सुझाव दिया था। इस कारणवश गांधारी प्रतीक रूप में विधवा मान ली गईं और बाद में उनका विवाह धृतराष्ट्र से कर दिया गया।

2.दासी के साथ सहवास 

गांधारी के पुत्रों को कौरव पुत्र कहा गया लेकिन उनमें से एक कौरववंशी नहीं था। धृतराष्ट्र और गांधारी के 99 पुत्र और एक पुत्री थीं जिन्हें कौरव कहा जाता था। गांधारी ने वेदव्यास से पुत्रवती होने का वरदान प्राप्त कर किया था। इस वरदान के चलते ही गांधारी को 99 पुत्र और एक पुत्री मिली थीं। उक्त सभी संतानों की उत्पत्ति 2 वर्ष बाद कुंडों से हुई थी। गांधारी की बेटी का नाम दु:शला था। गांधारी जब गर्भवती थी, तब धृतराष्ट्र ने एक दासी के साथ सहवास किया था जिसके चलते युयुत्सु नामक पुत्र का जन्म हुआ। इस तरह कौरव सौ हो गए।

3.पुत्र के मोह में करवाया युद्ध 

पुत्रमोह में धृतराष्ट्र पांडवों के साथ अन्याय कर रहे थे लेकिन राजा और राज सिंहासन के प्रति निष्ठा के चलते भीष्म उनके साथ बने रहे। धृतराष्ट्र ने अपने पुत्र-मोह में सारे वंश और देश का सर्वनाश करा दिया। धृतराष्ट्र चाहते तो वे अपने पुत्र के हठ और अपराध पर लगाम लगा सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया और दुर्योधन को गलती पर गलती करने की अप्रत्यक्ष रूप से छूट दे दी। पांडवों के साथ हुए अति अन्याय के चलते ही महाभारत युद्ध हुआ। राज सिंहासन पर बैठे धृतराष्ट्र यदि न्यायकर्ता होते तो यह युद्ध टाला जा सकता था। विदुर ने कई बार धृतराष्ट्र को नीति और अनीति के बारे में बताया लेकिन धृतराष्ट्र ने जानबूझकर विदुर की बातों को नजरअंदाज किया।

4.चीर हरण के समय धृतराष्ट्र का चुप रहना 

द्रौपदी के चीर हरण के समय भी भीष्म और धृतराष्ट्र चुप रहे और इसी के चलते भगवान कृष्ण को महाभारत युद्ध में कौरवों के खिलाफ खड़े होने का फैसला करना पड़ा। चीर हरण महाभारत की ऐसी घटना थी जिसके चलते पांडवों के मन में कौरवों के प्रति नफरत का भाव स्थायी हो गया। यह एक ऐसी घटना थी जिसके चलते प्रतिशोध की आग में सभी चल रहे थे।

5. पूर्व जन्म का पाप 

कहते हैं कि पूर्व जन्म में किए पाप के कारण धृतराष्ट्र जन्म से ही अंधे थे और उनके सभी पुत्र मारे गए। दरअसल, अपने पूर्व जन्म में धृतराष्ट्र एक बहुत ही निर्दयी एवं क्रूर राजा थे। एक दिन जब वे अपने सैनिकों के साथ राज्य भ्रमण को निकले तो उनकी नजर एक तालाब में अपने बच्चों के साथ आराम करते हंस पर पड़ी। उन्होंने सैनिकों को तुरंत आदेश दिया की उस हंस की आंखे निकाल ली जाए। सैनिकों ने राजा की आज्ञा का पालन किया। दर्द से बिलखते उस हंस की आंखों को निकालकर राजा अपने सैनिकों के साथ आगे बढ़ गया। उस हंस की असहनीय पीड़ा के कारण मृत्यु हो गई। इस घटना को देखकर उसके बच्चे भी मृत्यु को प्राप्त हो गए। मरते वक्त हंस ने राजा को शाप दिया था की मेरी ही तरह तुम्हारी भी यही दुर्दशा होगी। इसी शाप के कारण अगले जन्म में धृतराष्ट्र अंधे पैदा हुए तथा उनके पुत्र उसी तरह मृत्यु के प्राप्त हुए जिस तरह हंस के।