भृगु ऋषि ने भगवान विष्णु की छाती पर लात क्यों मारी?

भृगु ऋषि ने भगवान विष्णु की छाती पर लात क्यों मारी?

कहते हैं कि एक बार ऋषि भृगु और अन्य ऋषियों ने मिलकर एक यज्ञ का आयोजन किया, जिसमे नाराद मुनि भी शामिल थे। जब नारद जी ने ऋषियों से यह सवाल किया कि “ इस यज्ञ विशेष का फल किसे मिलेगा ?

इस पर ऋषियों ने जवाब दिया कि इस यज्ञ का फल उसे मिलेगा जो तीनों देवो में सर्वश्रेष्ठ है ! फिर यह विवाद पैदा हुआ कि ब्रहा विष्णु महेश में सर्वश्रेष्ठ कों न है ! इस विवाद के समाधान के लिए ऋषि भृगु को चुना गया । ऋषि भृगु का तीनों देवों पास जाना तय हुआ।

ऋषि भृगु सबसे पहले ब्रह्मा जी के लोक गए , उन्होंने वहां देखा कि ब्रह्मा जी देवी सरस्वती से बाते करने में व्यस्त थे । ऋषि भृगु यह देख क्रोधित हुए और उन्हें श्राप दिया कि उन्हें कभी भी धरती पर नहीं पूजा जायेगा। इसके बाद वह भगवान शिव के पास गए । भगवान शिव भी देवी पार्वती से बाते करने में व्यस्त थे । ऋषि को बेहद गुस्सा आया और भगवान शिव को भी श्राप दिया कि उनके पूजा सिर्फ शिवलिंग के रूप में ही जायेगी।

इसके बाद ऋषि भृगु विष्णु लोक गए । वहां भी उन्होंने देखा कि भगवान विष्णु देवी लक्ष्मी जी बाते करने में व्यस्त थे। इस बार ऋषि भृगु अत्यधिक क्रोधित हो गए और उन्होंने क्रोध में भगवान विष्णु की छाती पर जोर से लात मारी । लेकिन इस पर भगवान विष्णु क्रोधित नहीं हुए और उन्होंने ऋषि भृगु से अपनी गलती की क्षमा मांगी । इस पर ऋषि भृगु प्रसन्न हो गए और उन्होंने भगवान विष्णु को तीनों देवो में सर्वश्रेष्ठ माना ।