जानिए आखिर रामायण में कौन थी सरमा जिसने की थी प्रभु श्रीराम की मदद

जानिए आखिर रामायण में कौन थी सरमा जिसने की थी प्रभु श्रीराम की मदद

रामायण के बहुत से ऐसे पात्र है जिनका महिमा मंडन या फिर यु कहें की जिक्र मुख्य कहानी में नही किया गया है पर उनके बिना राम जी की जीत असंभव थी. रावण के दो पत्निया थी जिनमे पहली मंदोदरी जिनसे उसे इंद्रजीत और अक्षयकुमार दो पुत्र थे और दूसरी पत्नी थी दम्यमलिनी जिनसे रावण को अतिक्या और त्रिशिरा नाम के दो पुत्र भी थे लेकिन विभीषण और कुम्भकरण ने भी तो शादिया की थी, कुम्भकरण के पुत्र का नाम भीम था. 
परन्तु विभीषण की पत्नी और बच्चो का कंही जिक्र नही है जो हम आज आपको बता रहे है, विभीषण की पत्नी का नाम था सरमा जो की एक गन्धर्व कन्या थी. दोनों के एक पुत्री थी जिसका नाम था त्रिजटा, जिसका नाम रामायण में काफी बार आया है पर ऐसा नही बताया गया की वो विभीषण की बेटी थी.

दोनों माँ बेटी ने भगवान राम और सीता जी की बेहद मदद की थी, त्रिजटा हर मोड़ पे सीता का हौसला बनाये रखती थी और वो राम भक्त भी थी. एक बार त्रिजटा ने साड़ी राक्षसियों को अपना स्वप्न सुनाया जिसमे एक वानर ने आके पूरी लंका को आग लगा दी और अगले ही दिन हनुमान आ धमके जिससे राक्षसिया सीता को परेशान करते हुए डरती थी. 

सरमा ने भी सीता की बहुत बड़ी मदद की थी, एक बार रावण ने एक योजना बनाई थी उसने एक जादूगर से कह कर राम का नकली कटा हुआ सर बनवाया था जिससे की सीता को राम की मृत्यु की बात मनाई जा सके और वो रावण से विवाह कर ले, पर जब रावण अपने मंत्रियो से ये गुफ्तगू कर रहा था तो सरमा ने सीता को ये बात बता दी और सीता राम का सर देख कर विचलित नही हुई थी.जब युद्ध के दौरान रावण अदृश्य हो के युद्ध कर रहा था तो उसके पीछे था एक गुप्त स्थान पर हो रहा यज्ञ जिसका पता भी सरमा ने ही राम को बताया था तब हनुमान और वानर सेना ने यज्ञ ध्वस्त किया और रावण का वध मुमकिन हो सका था.