जाने उस कथा को जब शिव भगवान से कथा सुनकर कबूतरों का जोड़ा हो गया था अमर

जाने उस कथा को जब शिव भगवान से कथा सुनकर कबूतरों का जोड़ा हो गया था अमर

एक बार की बात है माता पार्वती और भगवान शिव कैलाश पर आपस में बातचीत कर रहे थे. उसी समय माता पार्वती ने शिव भगवान से पूछा कि तुम्हारे गले में मुंडमाला कैसी है. भगवान शिव ने कहां कि जितनी बार तुमने जन्म लिया है,उतने ही मुंड इस माला में लगे हुए हैं| माता पार्वती ने कहा ऐसा क्यों होता है कि मुझे बार-बार जन्म लेना पड़ता है क्यों मेरा शरीर नश्वर है आपका नहीं. भगवान शिव ने कहा किया अमर कथा का प्रभाव है| तब माता पार्वती ने भी भगवान शिव से अमर कथा सुनने की इच्छा प्रकट की. 

पहले तो भगवान शिव उन्हें डालते रहे मगर बाद में उनकी जिंदगी आगे उन्हें झुकना ही पड़ा. तब भगवान शिव ने कहा या ऐसी कथा है जो भी इंसान जीव, पशु-पक्षी इसे सुनेगा वह अमर हो जाएगा. इसलिए इसे सुनाने से पहले किसी ऐसे स्थान पर चलना होगा जहां पर तुम्हारे अलावा कोई दूसरा इसे ना सुन सके. ऐसे स्थान की खोज करते-करते,भगवान शिव और माता पार्वती एक गुफा के पास पहुंचे. गुफा के अंदर जाने से पहले भगवान शिव ने अपने सभी वस्तुओं का त्याग कर दिया यहां तक कि पंच तत्वों का भी त्याग कर दिया था.इसके पश्चात वे दोनों अंदर गए.

उसके बाद भगवान शिव ने माता पार्वती को अमर कथा सुनानी आरंभ कर दी. परंतु थोड़ी देर के पश्चात माता पार्वती को नींद आ गई.  इस बात का पता शिव जी को नहीं चला एक कथा सुनाते चले गए. कथा समाप्त करने के पश्चात उनकी नजर माता पार्वती पर पड़ी. उन्होंने देखा कि पार्वती सो रही है फिर उसकी जगह पर हूं हूं करके जवाब कौन दे रहा था. तभी उनकी नजर गुफा में एक कबूतर के जोड़े पर पड़ी वे बहुत क्रोधित हो गए. उनके क्रोधित होते ही माता पार्वती की आंख खुल गई.

उन्होंने भगवान शिव को शांत किया और कहा यह दोनों कबूतर अमर कथा सुनने के कारण अमर हो गए हैं. यदि आपने इन का वध किया तो यह कथा झूठी हो जाएगी. कहा जाता है कि वे दोनों कबूतर आज भी उस गुफा में भगवान शिव और पार्वती के रूप में जाने जाते हैं और वहीं उसी गुफा में निवास करते हैं. अमर कथा के कारण उस गुफा का नाम अमरनाथ गुफा पड़ गया. जहां हर साल लाखों श्रद्धालु बाबा अमरनाथ बर्फानी के दर्शन करने के लिए जाते हैं.