इस मंदिर में जब भगवान श्रीकृष्ण ने शनि देव को दिया था वरदान

इस मंदिर में जब भगवान श्रीकृष्ण ने शनि देव को दिया था वरदान

शनि देव जिनकी क्रूर दृष्टि से हर कोई बचना चाहता है लेकिन अगर किसी के ऊपर शनि की कृपा दृष्टि हो गयी तो उसके भाग खुल जाते हैं. देशभर में शनि के कई मंदिर हैं पर दिल्ली से 128 किमी की दूरी पर कोसीकलां नाम की जगह पर सूर्यपुत्र भगवान शनिदेव का मंदिर है। यह उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में आता है, इसके आसपास ही नंदगांव, बरसाना और श्री बांकेबिहारी मंदिर भी है। कहा जाता है कि यहां की परिक्रमा करने पर मनुष्य की सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। इसके बारे में लोक मान्यता है कि यहां पर खुद भगवान कृष्ण ने शनिदेव को दर्शन दिए थे और वरदान दिया था कि जो भी मनुष्य पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ इस वन की परिक्रमा करेगा उसे शनि कभी कष्ट नहीं पहुचाएंगे।

शनि मंदिर से जुड़ा इतिहास

इस मंदिर के बारे में लोगों का कहना है कि जब मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था तब स्वर्ग से सभी देवता कृष्ण के बाल रूप को देखने मथुरा आए थे। उन देवताओं में शनिदेव भी थे। जब शनिदेव ने भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन की इच्छा जताई तो कृष्ण के पालक पिता नन्द बाबा ने शनिदेव को भगवान श्रीकृष्ण का दर्शन कराने से मना कर दिया। नन्द बाबा को लगा कि शनिदेव की दृष्टि पड़ते ही कहीं कृष्ण के साथ कुछ अमंगल न हो जाए।

शनिदेव ने भगवान श्रीकृष्ण से दर्शन देने की विनती की तो कृष्ण ने शनिदेव को कहा कि वे नंदगांव के पास के वन में जाकर तपस्या करे। वहीं वे शनिदेव को दर्शन देंगे। शनिदेव की तपस्या से भगवान श्रीकृष्ण बहुत प्रसन्न हुए और कोयल के रूप में उन्होंने शनिदेव को दर्शन दिया। मान्यता है कि कोयल के रूप में दर्शन देने के कारण ही इस वन का नाम कोकिलावन पड़ा।

मंदिर से जुड़ी जानकारियां

मान्यता है कि जो भी भक्त यहां पूजा करने आते हैं शनिदेव उनकी मुराद जरूर पूरी करते हैं। मंदिर के चारों ओर करीब 3 किलोमीटर के गोल घेरे में परिक्रमा पथ बना हुआ है। यहां आने वाले भक्त भगवान शनि की पूजा करने से पहले मंदिर की परिक्रमा करते हैं। परिक्रमा करने के बाद मंदिर जाकर पूजा-अर्चना की जाती है। शनि मंदिर के आस-पास और भी अनेक मंदिर हैं जहां भक्त पूजा कर सकते हैं। खास बात यह है कि प्रतिज्ञा करने वाले जिन भक्तों की मुराद पूरी हो जाती है वे यहां दंडवत परिक्रमा भी करते हैं। मंदिर से कुछ दूर पहले ही अनेक लोग दान-धर्म करते हुए गरीबों को भोजन कराते हैं।

शनि मंदिर कैसे पहुंचें

मुथरा से करीब 21 किलोमीटर की दूरी पर कोसीकलां नाम का एक गांव है। इसी गांव के पास जंगल शुरू हो जाता है। यहीं पर शनिदेव की मंदिर स्थित है। सड़क मार्ग से आने वाले भक्त सीधे मंदिर तक पहुंच सकते हैं। सड़क मार्ग से मंदिर तक आने का मार्ग बहुत सुगम है। रेल माध्यम से आने वाले लोगों को मथुरा स्टेशन उतरना पड़ेगा। मथुरा से कोसीकलां पहुंचने के लिए भक्तों को लोकल ट्रेन पकड़नी होगी। रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी करीब 6 किलोमीटर है। रेलवे स्टेशन से मंदिर तक आने-जाने के लिए टैम्पो आदि की सुविधा उपलब्ध रहती है।