जानिए भगवान शिव के पास कौन कौन से शक्तिशाली अस्त्र हैं ?

जानिए भगवान शिव के पास कौन कौन से शक्तिशाली अस्त्र हैं ?

देवो के देव महादेव जिनका न कोई आदि है न कोई अंत महादेव का अर्थ है देवताओं में सबसे उच्च और महान शिव एक ऐसे देवता है जिनका क्रोध और प्रेम दोनों चरम हैं. शिव जी के विषय में चर्चा हो और उनके अस्त्रों की बात न हो ये तो संभव ही नहीं है. भगवान शिव के अस्त्र इतने भयानक थे कि उनका एक प्रयोग मात्र पूरी दुनिया को ख़त्म करने में सक्षम था. तो आइये जानते है भोलेनाथ के अस्त्रों और उनकी विशेषताओं के बारे में 

1. त्रिशूल 

शिव जी के हाथ में त्रिशूल तीन गुणों सत्व , रजो और तम को दर्शाता है साथ ही मनुष्य शरीर और मस्तिष्क में उपस्थित नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करने का भी प्रतीक हैं. मानव शरीर में एक स्थान पर तीन नाड़ियों का मिलान होता हैं. जो त्रिशूल की ही आकृति का हैं. ये तीन नाड़ियां ऐड़ा , पिंगला और सुषुमना कहलाती हैं. ऐड़ा और पिंगला को इनकी विशेषता के आधार पर शिव और शक्ति का नाम दिया गया हैं. वहीं सुषुमना नाड़ी बहुत शक्तिशाली हैं. कहा जाता है कि यदि मनुष्य सुषुमना नाड़ी पर सारी ऊर्जा को केंद्रित करने में सक्षम हो जाता है तो बाहरी दुनिया की हलचल उसे प्रभावित नहीं कर सकती। ऐसी मान्यता है की सृष्टि के आरम्भ में जब ब्रह्मनाद ने शिव को उत्प्न्न किया तब साथ में  तीन गुण भी उत्तपन्न हुए. इस सृष्टि में सामंजस्य बैठाने के लिए इन तीन गुणों के बीच सामंजस्य बैठाना आवश्यक था.इसलिए शिव जी ने इन तीनों गुणों को अपने हाथ में धारण किया। शिव जी का यह अस्त्र बहुत ही घातक और विनाशकारी हैं. 

2. शिव धनुष : पिनाक 

पिनाक का निर्माण स्वयं शिव जी ने ही किया था. इस धनुष के ध्वनि मात्र से ही पर्वत हिल जाते थे और बादल फटने लगते थे और पृथ्वी पर भूकंप जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती थी. पुराणों में  उल्लेखनीय है कि जब राजा दक्ष ने यज्ञ में भगवान शिव का भाग नहीं निकाला तो क्रोध में शिवजी ने सभी देवताओं का विनाश करने का निर्णय किया। तब बहुत मुश्किल से शिव का क्रोध शांत कर पिनाक धनुष देवताओ को दिया गया और अंतः देवताओं ने ये धनुष राजा जनक के पूर्वज देवरात को दे दिया। राजा जनक ने इसको शिव की धरोहर समझ कर सुरक्षित रूप से रख लिया। ऐसा कहा जाता है कि इस धनुष को उठाने की क्षमता हर किसी में नहीं थी परन्तु भगवान राम ने इसको एक झटके में तोड़ दिया था. 

3. भवरेंद्रु चक्र 

यह बहुत ही शक्तिशाली चक्र था 

4. पाशुपताशास्त्र 

शिव जी का सबसे खास , प्रिय और सबसे विध्वंशक अस्त्र है ये पाशुपताशास्त्र। इसके प्रभाव से बचना बहुत ही कठिन था. यह सम्पूर्ण सृष्टि का विनाश करने में सक्षम था. इस अस्त्र को पशुपतिनाथ ने ब्रह्माण्ड की रचना से पूर्व तपस्या कर आदि शक्ति से प्राप्त किया था. चूकि इस अस्त्र से पूरी सृष्टि का अंत किया जा सकता था इसलिए अर्जुन ने इसका इस्तेमाल नहीं किया था. पाशुपताशास्त्र को केवल भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र ही प्रभावहीन कर सकता था यह अस्त्र चारों दिशाओं से विजय दिला सकता था. इसे आँख , शब्द , धनुष  और मन से छोड़ा जा सकता था. ऐसा कहा जाता है कि शिव इसी अस्त्र से सृष्टि का विनाश करेंगे। पुराणों के उल्लेख से ज्ञात होता है कि जब पाशुपताशास्त्र को चलाया जाता था तो इसके बाद सब कुछ नष्ट हो जाता था. इसका  प्रयोग होने से नकारात्मक शक्तियां जैसे दैत्य , शैतान आत्माएं आदि आ जाते थे और इसे ओर भी शक्तिशाली बना देते थे. पाशुपताशास्त्र का एक स्रोत भी है जिसके कारण जीवन के हर क्षेत्र में विजय प्राप्त की जा सकती हैं. इसका जप करने से मनुष्य जीवन की सब विध्नों से विजय प्राप्त की जा सकती हैं. पाशुपताशास्त्र के सामने जीवित या मृत सबकुछ नष्ट हो जाता था परन्तु इतना शक्तिशाली होने के बावजूद पुरातन काल का सर्वाधिक शक्तिशाली अस्त्र पाशुपताशास्त्र नहीं हैं. ब्रह्मा द्धारा निर्मित ब्रह्मदण्ड और भगवान विष्णु द्धारा निर्मित नारायणशास्त पाशुपताशास्त्र से कही ज्यादा शक्तिशाली और विनाशकारी हैं.