षटतिला एकादशी का क्या है धार्मिक महत्व और क्या है इसकी कथा

षटतिला एकादशी का क्या है धार्मिक महत्व और क्या है इसकी कथा

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार एकादशी महीने में दो बार मनाई जाती है और हिन्दू धर्म में इसका बहुत ही धार्मिक महत्व हैं और इस दिन कई लोग व्रत रखते है क्योकि शास्त्रों के अनुसार इस दिन व्रत करने से जीवन में लाभ मिलता हैं. आज हम आपको  षटतिला एकादशी के बारे में बताने जा रहे है जो कि 20 जनवरी को पड़ रही हैं. इस एकादशी को हम माघ मास कृष्ण पक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी के नाम से जानते हैं और अन्य एकादशी की तरह इस एकादशी का भी बहुत ही विशेष महत्व हैं. चूंकि पूरा माघ मास पूजा उपासना के लिए पवित्र माह माना जाता है ऐसे में षटतिला एकादशी का महत्व और बढ़ जाता है। मान्यता है कि इस एकादशी के व्रत से अक्ष्य पुण्य की प्राप्ति होती है। एकादशी के दिन स्नान, दान और व्रत का विशेष प्रयोजन होता है। मान्यता है कि 24 एकादशियों का व्रत करने वाले मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

षटतिला एकादशी के दिन काले दिन से भगवान विष्णु की पूजा करने का विशेष फल प्राप्त होता है। साल की सभी 24 एकादशियां भगवान विष्णु की पूजा उपासना के लिए समर्पित होती हैं। लेकिन सभी का अपना अलग महत्व होता है। षटतिला एकादशी के दिन तिल का दान करना व काली की पूजा करने का भी प्रचलन है।

षटतिला व्रत का महत्व-
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जितना पुण्य कन्यादान, हजारों वर्षों की तपस्या और स्वर्ण दान करने के बाद मिलता है, उससे कहीं ज्यादा फल एकमात्र षटतिला एकादशी का व्रत करने से प्राप्त होता है। तिल का उपयोग पूजा, हवन, प्रसाद, स्नान, स्‍नान, दान, भोजन और तर्पण में किया जाता है। तिल के दान के दान का विधान होने के कारण कारण यह षटतिला एकादशी कहलाती है।

एकादशी पूजा विधि 
एकादशी के दिन प्रात: स्नानादि के बाद भगवान विष्णु की पूजा अराधना की जाती है। तिलयुक्त हवन किया जाता है। इसके बाद पूरे दिन उपवास रखते हुए नारायण का ध्यान किया जाता है। तुलसी पर घी का दीपक जलाएं और सूर्यास्त के वक्त शाम को एक बार फिर जोत जलाकर पूजा करें। इसके अगले दिन सुबह स्नानकर पूजा करने के बाद व्रत का पारण किया जाता है।