आखिर शिवलिंग का वास्तविक अर्थ क्या हैं ?

आखिर शिवलिंग का वास्तविक अर्थ क्या हैं ?

शिव लिंग क्या है , शिवलिंग का वास्तविक अर्थ क्या हैं , आखिर शिवलिंग क्या प्रस्तुत करता हैं. और आज इस रहस्य से पर्दा उठने जा रहा हैं. बहुत लोगों ने शिवलिंग का गलत अर्थ बताकर लोगों को भ्रमित कर रखा हैं. लेकिन सबसे ज्यादा आश्चर्य वाली बात ये है कि इसमें विदेशी लोगों के साथ साथ कुछ अपने देश के लोग भी शामिल है.इन लोगो ने शिवलिंग का इतना गन्दा मतलब निकाल रखा है कि हम उसको बताना भी महादेव का अपमान समझते हैं. लेकिन अब ओर नहीं आज के बाद आपको शिवलिंग का वास्तविक अर्थ और उसका मतलब पता लग जाएगी। आज के बाद आपसे कोई फालतू की बाते करें तो उसको ये वीडियो जरूर भेजना। शिव लिंग एक संस्कृत शब्द है जिसमें लिंग का मतलब होता है प्रतीक, यानि शिवलिंग का मतलब हुआ शिव का प्रतीक यानि एक ऐसी चीज़ जिसको हम शिव मानकर पूजा करते हैं. आज हम आपको बताएंगे शिवलिंग के बारे में और इसकी शक्तियों के बारे में. शिवलिंग एक ऐसा ढांचा है जिसको एक खास मकसद से बनाया जाता हैं.

आपने भगवान शिव के तरह तरह के शिव लिंग देखे होंगे। यह सभी शिवलिंग मनुष्यों के द्धारा बनाए गए हैं. कहीं कहीं अपनी भक्ति  दिखाने के लिए जैसा मन में आया वैसा शिवलिंग बना दिया। लेकिन  हम जब 12 ज्योर्तिलिंग को देखते है तो उन सब की शेप अलग हैं. क्योकि अलग अलग मकसद के लिए अलग अलग शिवलिंग बनाए गए है.  इनमें कुछ शिव लिंग को सेहत के लिए बनाया गया है तो कुछ शिवलिंग को खुशहाली के लिए तो कुछ को ध्यान साधना के लिए. लेकिन इन सब चीज़ों में एक चीज़ कॉमन हैं. ये सभी शिवलिंग अलोशिप शेप के हैं इसका सरल अर्थ ये है शिव किसी स्त्री या पुरुष का प्रतीक न होकर सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड , आकाश , शून्य और निराकार का प्रतीक हैं. उन्हें किसी एक  चीज़ में नहीं रखा जा सकता हैं. क्योकि वो खुद एक प्रतीक हैं. अगर आप वैज्ञानिकों के द्धारा ली गयी कुछ तस्वीरें देखेंगे तो आप पायेंगे कि हमारा ब्रह्माण्ड भी शिव लिंग से मिलता जुलता हैं. स्कंदपुराण के अनुसार आकाश स्वयं एक लिंग हैं और शिवलिंग समस्त ब्रह्माण्ड की धुरी हैं. शिवलिंग अनंत हैं. इसकी न कोई शुरुआत है न कोई अंत. इसलिए शिवलिंग का एक अर्थ अंत भी होता हैं. बहुत से शिवलिंगों को प्राचीन ज्ञान और शास्त्रों में दिए गए निर्देश से बनाया गया हैं.  इन सभी शिवलिंगों के पीछे वैज्ञानिक तर्क भी छिपे हुए हैं.  ऐसा ही  एक शिवलिंग ध्यान के लिए श्री सदगुरु जी ने बनवाया हैं. इसका नाम ध्यानलिंगम हैं. ब्रह्माण्ड में में दो ही चीज़ें है पहला है एनर्जी और दूसरा पदार्थ। मानव शरीर पदार्थ से निर्मित हैं  और आत्मा ऊर्जा हैं. इसी प्रकार शिव पदार्थ और उनकी शक्तियां ऊर्जा हैं और वो दोनों मिलकर शिवलिंग बनाते हैं. वास्तव में शिवलिंग हमारे ब्रह्माण्ड की आकृति हैं. शिवलिंग भगवान शिव और माता पार्वती का आदि-अनादि रूप है तथा पुरुष और प्रकति की समानता का प्रतीक भी है. अर्थात इस प्रकृति में स्त्री और पुरुष दोनों का समान रूप से वर्चस्व हैं. किसी मुर्ख को आसान भाषा में समझाने के लिए आप ये बता सकते है कि शिवलिंग शिव का प्रतीक हैं.