इस गणेश मंदिर में छिपा है अयोध्या के राम मंदिर का रहस्य, यकीन नहीं कर पाओगे | उच्ची पिल्लयार मंदिर
रावण का वध करने के उपरांत प्रभु श्रीराम ने अपने स्वरूप रंगनाथ की एक प्रतिमा विभीषण को दे दी थी और उसको लंका ले जाकर उसको वहां स्थापित करने के लिए कहा था. लेकिन जब ये बात अन्य देवताओं को पता लगी तो उन्होंने भगवान गणेश से इस बात को कहा की भगवान रंगनाथ की प्रतिमा स्थापति कर देंगे और वे नहीं चाहते कि विभिषण ऐसा करें। भगवान श्रीराम ने विभिषण को प्रतिमा देते हुए कहा था प्रतिमा को जमीन जहां रखा जाएगा प्रतिमा वहीं रह जाएगी। विभीषण त्रिचि पहुंचे तो वहां पर कावेरी नदी में उन्हें स्नान का मन हुआ लेकिन प्रतिमा जमीन पर रखी नहीं जा सकती थी। तभी उन्हें एक बालक गाय चराते हुए नजर आया और विभिषण ने प्रतिमा उसे पकड़ा कर जमनी पर न रखने का अनुरोध किया। यह बालक गणपति जी थे। विभिषण के स्नान के जाते ही वह प्रतिमा जमीन पर रख दिए। यह देख कर विभिषण क्रोधित हो उठे। प्रतिमा जमीन पर से विभीषण ने उठाने का बहुत प्रयास किया लेकिन वह प्रतिमा वहीं रह गई। इससे क्रोध हो कर विभिषण बालक की ओर भागे। अपनी ओर विभिषण को आता देख भगवान गणेश भागते हुए पर्वत के शिखर पर पहुंच गए लेकिन आगे रास्त नहीं था। विभिषण भी गुस्से में वहां तक पहुंच आए और गणपति जी के सिर पर वार कर दिया। तभी गणपति जी ने अपने असली रूप को विभिषण के समक्ष पेश किया और तब विभिषण को ज्ञात हुआ कि ये तो गणपति जी है और उनसे उन्होंने क्षमा मांगी। विभीषण के वार से गणपति जी को चोट लगी थी वह उनकी प्रतिमा में आज भी नजर आती है।