शिव के रूद्राभिषेक करने से होते है ये आश्चर्यजनक फायदे ? पढ़े

शिव के रूद्राभिषेक करने से होते है ये आश्चर्यजनक फायदे ? पढ़े

पुराणों में या धर्मग्रंथों में यही लिखा है कि हमारे द्धारा किये गए पाप ही हमारे दुखों का कारण होते है और ऐसा माना जाता है कि सोमवार के दिन भगवान शिव को रुद्राभिषेक करने से हमारे जीवन के समस्त पाप जलकर भस्म हो जाते हैं और साधक में शिवत्व का उदय होता है और भक्त को शिव भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है. ऐसा भी माना जाता है कि केवल शिव के रूद्र पूजन से सभी देवताओं की पूजा भी पूरी मानी जाती हैं. 

रुद्राभिषेक के विभिन्न पूजन के लाभ इस प्रकार हैं-

  1. जल से अभिषेक करने पर वर्षा होती है।
  2. असाध्य रोगों को शांत करने के लिए कुशोदक से रुद्राभिषेक करें।
  3. भवन-वाहन के लिए दही से रुद्राभिषेक करें।
  4. लक्ष्मी प्राप्ति के लिए गन्ने के रस से रुद्राभिषेक करें।
  5. धनवृद्धि के लिए शहद एवं घी से अभिषेक करें।
  6. तीर्थ के जल से अभिषेक करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  7. इत्र मिले जल से अभिषेक करने से बीमारी नष्ट होती है।
  8. पुत्र प्राप्ति के लिए दुग्ध से और यदि संतान उत्पन्न होकर मृत पैदा हो तो गोदुग्ध से रुद्राभिषेक करें।
  9. रुद्राभिषेक से योग्य तथा विद्वान संतान की प्राप्ति होती है।
  10. ज्वर की शांति हेतु शीतल जल/ गंगाजल से रुद्राभिषेक करें।
  11. सहस्रनाम मंत्रों का उच्चारण करते हुए घृत की धारा से रुद्राभिषेक करने पर वंश का विस्तार होता है।
  12. प्रमेह रोग की शांति भी दुग्धाभिषेक से हो जाती है।
  13. शकर मिले दूध से अभिषेक करने पर जड़बुद्धि वाला भी विद्वान हो जाता है।
  14. सरसों के तेल से अभिषेक करने पर शत्रु पराजित होता है।
  15. शहद के द्वारा अभिषेक करने पर यक्ष्मा (तपेदिक) दूर हो जाती है।
  16. पातकों को नष्ट करने की कामना होने पर भी शहद से रुद्राभिषेक करें।
  17. गोदुग्ध से तथा शुद्ध घी द्वारा अभिषेक करने से आरोग्यता प्राप्त होती है।
  18. पुत्र की कामना वाले व्यक्ति शकर मिश्रित जल से अभिषेक करें। ऐसे तो अभिषेक साधारण रूप से जल से ही होता है।

परंतु विशेष अवसर पर या सोमवार, प्रदोष और शिवरात्रि आदि पर्व के दिनों में मंत्र, गोदुग्ध या अन्य दूध मिलाकर अथवा केवल दूध से भी अभिषेक किया जाता है। विशेष पूजा में दूध, दही, घृत, शहद और चीनी से अलग-अलग अथवा सबको मिलाकर पंचामृत से भी अभिषेक किया जाता है। तंत्रों में रोग निवारण हेतु अन्य विभिन्न वस्तुओं से भी अभिषेक करने का विधान है। इस प्रकार विविध द्रव्यों से शिवलिंग का विधिवत अभिषेक करने पर अभीष्ट कामना की पूर्ति होती है।
इसमें कोई संदेह नहीं कि किसी भी पुराने नियमित रूप से पूजे जाने वाले शिवलिंग का अभिषेक बहुत ही उत्तम फल देता है किंतु यदि पारद के शिवलिंग का अभिषेक किया जाए तो बहुत ही शीघ्र चमत्कारिक शुभ परिणाम मिलता है। रुद्राभिषेक का फल बहुत ही शीघ्र प्राप्त होता है।