शनिदेव का वो  मंदिर जहाँ महाबली हनुमान ने रावण की कैद से मुक्त किया था

शनिदेव का वो मंदिर जहाँ महाबली हनुमान ने रावण की कैद से मुक्त किया था

शनि देव जिसका नाम ध्यान में आते है सबसे गुस्से वाले देवता की तस्वीर उभर के आती हैं. देश भर में कई चमत्कारिक शनि मंदिर हैं। जहाँ शनि देव की महिमा अमरमपार है। मध्य प्रदेश के ग्वालियर के समीप एंती गांव हैं जहाँ पर विराजित शनि देव का देश भर में विशेष महत्व है। भगवान हनुमान रावण की कैद से छुड़वा कर शनि देव को यहीं पर लाये थे। तब से यहाँ पर शनि देव विराजमान हैं। बताया यह भी जाता है कि यहाँ शनि मंदिर पर प्रतिष्ठित शनि देव की प्रतिमा आसमान से टूट कर गिरे एक उल्कापिंड से निर्मित है जिससे यह स्थान विशेष प्रभावशाली है। बताया जाता है कि आज भी यहाँ अमर रूप में शनि देव विराजमान हैं। शनि देव के चमत्कार को देखते हुए ग्वालियर के सिंधिया राज घराने द्वारा इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया गया था।

शनि देव की महिमा के आगे सब बेअसर होता है। जिस पर शनि देव की दिव्य दृष्टि पड़ जाए समझ लो वह भव सागर से पार हो जाता है। मुरैना जिले में आने वाले इस शनिचरा मंदिर के बारे में एक कथा विख्यात है। बताया जाता है कि जब भगवान महाबली हनुमान रावण की लंका जलाने वाले थे तब उनकी नजर उस जगह पर पड़ी जहाँ पर रावण ने अन्य देवताओं के साथ ही शनि देव को भी बंदी बना रखा था। शनि देव ने हनुमानजी से रावण की कैद से छुड़ाने का आग्रह किया। जिसके बाद हनुमान ने शनि देव को रावण की कैद से छुड़वाया। रावण की कैद में रहने से शनि देव कमजोर हो गए थे तो उन्होंने हनुमान से विनती करी कि वे उन्हें किसी सुरक्षित जगह पर भेज दें। जिसके बाद हनुमान ने शनि देव को यहाँ पर बने पर्वत पर लाकर छोड़ दिया। शनि देव के प्रकोप से ही रावण की लंका तो जली ही साथ ही साथ उसके कुल का भी विनाश हो गया।
 
मुरैना जिले में स्थित शनिचरा मंदिर के चमत्कार किसी से नहीं छुपे हैं। यहाँ पर लोगों की अपार आस्था है। शनि देव सबकी मुरादें भी पूरी करते हैं। बताया जाता है कि जब शनि देव को रावण की कैद से छुड़वा कर हनुमानजी ने उन्हें यहाँ छोड़ा था तो शनि देव जिस जगह गिरे थे वहाँ एक बड़ा-सा गड्ढा हो गया था। यह गड्ढा आज भी यहाँ पर मौजूद है। शनिवार एवं शनिश्चरी अमावस्या के दिन आज भी यहाँ श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।
 
भगवान शनि देव इस चमत्कारिक जगह पर त्रेतायुग में आकर विराजमान हुए थे। बताया जाता है कि यहाँ पर शनि देव के मंदिर का निर्माण राजा विक्रमादित्य ने करवाया था। जिसके बाद शनि देव की महिमा एवं चमत्कारों से प्रभावित होकर ग्वालियर के तत्कालीन महाराजा दौलतराव सिंधिया ने मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया। वर्तमान में यह मंदिर मध्य प्रदेश सरकार के अधीन है। जिसका प्रबंधन मुरैना जिला प्रशासन द्वारा किया जाता है। बताया जाता है कि शनिश्चरा मंदिर पर्वत से ही महाराष्ट्र के सिगनापुर शनि मंदिर में प्रतिष्ठित शनि शिला ले जाई गई है। जब से यहाँ शनिदेव विराजित हुये हैं तब से ग्वालियर क्षेत्र में लौह उत्पादन काफी बढ़ा है। शनि देव की कृपा एवं महिमा को देखते हुए यहाँ हर वर्ष शनि जयंती पर विशाल मेला लगता है, जिसमें लाखों की संख्या में भीड़ उमड़ती है। हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या को शनि जयंती के अवसर पर लगने वाले मेले में देश भर से यहाँ भक्त अपनी मुराद लेकर पहुँचते हैं और शनि देव उनकी हर मुराद पूरी करते हैं।