जानिए आत्मतेश्वर मंदिर की कथा जिसको बसाने के लिए खुद प्रकट हुई स्वयंभू प्रकट हुए थे महादेव


जानिए आत्मतेश्वर मंदिर की कथा जिसको बसाने के लिए खुद प्रकट हुई स्वयंभू प्रकट हुए थे महादेव

भारत वर्ष में आपने पुष्कर शहर क नाम तो जरूर सुना होगा जो की तीर्थो का पिता कहा जाता है और तीर्थ गुरु भी? मुख्य रूप से ब्रह्मा जी के दुनिया में एकमात्र मंदिर के लिए जाना जाने वाला शहर असल में सनातन (हिन्दू) इतिहास में काफी बड़ी मान्यता रखता है. यंहा सभी प्रमुख ऋषियों के आश्रम है, यंहा पर त्रिदेवो ने तपस्या की है कोई भी ऐसा पौराणिक इतिहास का पात्र नहीं जो पुष्कर नहीं आया हो. भगवान् वामन ने बलि से दान ली तीन पग भूमि नापते समय अपना धरती पर पैर इन्ही पर रखा था जो की अब विष्णुपदी (सुधा बाय) के नाम से प्रसिद्द है.

वंही शिव जी ने पाताल गंगा प्रकट की थी और बाद में उसे नाग बिल को पर्वत से धक् दिया था उसके बावजूद भी वो वंहा प्रकट हुए थे और स्वर्ग में भीड़ बढ़ने लगी थी. तब इंद्र ने उस स्थल को मिटटी से पाट दिया वो स्थान आज बुड्ढा पुष्कर के नाम से विख्या है और पिंड दान के लिए सर्वोत्तम है.पुष्कर शहर पहले एक वन क्षेत्र हुआ करता था जो की हाटकेश्वर क्षेत्र के नाम से जाना जाता था उस वन से गुजरते हुए एक राजा ने यंहा तपस्या आरम्भ की और भगवान् शंकर को प्रसन्न किया. भगवान् शंकर ने उसे दर्शन दिए और उन्होंने ही आज्ञा दी राजा को यंहा नगर बसाने की.

उस राजा का नाम चमत्कार था और उसी के नाम से तब ये नगर चमत्कारपुर बसाया गया था राजा ने यंहा तब ब्राह्मणो को बसा दिया और उनके जीवन यापन की पूरी व्यवस्था भी की. राजा के कहने पर तब भगवान् शिव स्वयं स्वयंभू रूप में प्रकट हुए जो आज भी वंहा विद्धमान है. उस शिव लिंग का नाम हाट-मठेश्वर था जो की कालांतर में अब आत्मतेश्वर हो गया है, मंदिर के ऊपर शिव मंदिर बन गया है लेकिन असली मंदिर उसी के गर्भ गृह में स्तिथ है जिसके दर्शन मात्र से करोडो पाप धुप जाते है....ऐसे ही पुष्कर में अचलेश्वर महादेव मंदिर भी है जो भी काफी प्रभाव वाला है.

ब्रह्मा जी के आशीर्वाद से सप्तऋषियों ने मार्कण्डेय जी को अमरत्व की प्राप्ति करवाई थी तब बदलने में उन्होंने मार्कण्डेय को उनके निवास स्थान यानी चमत्कार पुर में ब्रह्मा जी की स्थापना करने को कहा था. तब मरकंडू ऋषि के पुत्र मार्कण्डेय ने ही यंहा ब्रह्मा जी की स्थापना की थी. ब्रह्मा सरोवर की भी महिला अनंत है और कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा और संक्रांति को स्नान का यंहा विशेष फल है.