‘हनुमानजी’ के वो रहस्य, जिनसे ‘अमेरिका’, ‘रूस’ तक चौंक गए

‘हनुमानजी’ के वो रहस्य, जिनसे ‘अमेरिका’, ‘रूस’ तक चौंक गए

विश्व के सबसे प्राचीन हिन्दू धर्म की जड़ें इतनी गहरी है कि उन्हें जीतना जानने का प्रयास करो वो उतनी ही गहराती चली जाती हैं, हिन्दू धर्म से जुड़ें तथ्य इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं, उससे कई ज्यादा तथ्य तो इस धरती ने अपने अंदर समेटे हुए हैं. जो समय समय पर निकल कर अपने गौरवशाली इतिहास का वर्णन करते है भारत में ही नहीं बल्कि विश्व में भी कई ऐसी खोज हुई है जो बताने के लिए लिए काफी है कि हमारा सनातन धर्म हज़ारों वर्षों पूर्व से अपनी उत्तपति की गौरव गाथा जाता चला जा रहा हैं और आज मैं आपको बताऊंगा ऐसे आश्चर्य तथ्य के बारे में. वानर भगवान के गुम हुए शहर की खोज और इसके लिए आपको चलना होगा मध्य अमेरिका के पूर्वी होंडुरास के मस्कीटिया क्षेत्र में. 

दरअसल ये वो क्षेत्र है जिसके ऊपर से एक बार प्रसिद्ध शोधकर्ता चाल्स लिंडबर्ग उड़ान भर रहे थे तभी उनकी नज़र होंडुरास के जंगलों के बीच वानर भगवान के खोये हुए शहर पर पड़ी जिसके बारे में मान्यता था कि वहां लोग एक बड़ी वानर मूर्ति की पूजा किया करते थे. लिंडबर्ग की जानकारी को आधार बना कर एक अमेरिकी एडवेंचरर थियो लोड मोर ने इस खोये हुए शहर को 1940 में ढूंढ निकाला, उसने दावा किया की इस क्षेत्र के भारतीयों ने के विशालकाय मूर्ति के लिए कई बलिदान दिए लेकिन इससे पहले कि वो उस क्षेत्र की सटीक जगह का ऐलान करता उससे पहले ही लन्दन में कर दुर्घटना में उसकी मौत हो गयी. 

दरअसल मोड काफी पहले से इस जगह की तलाश में लगा हुआ था जिसके बारे में सबसे पहले दावा हेमंत कोटजे ने किया था और कहा था ये देवताओं का रहस्यमय स्थान है और यहां पर सोने का गुप्त भंडार भी हैं बाद में हूयटन विश्वविद्यालय और लेजर मेपिंग केंद्र के खोजकर्ताओं ने सच्चाई का पता लगाने के लिए पूर्वी होंडुरास के मस्कीटिया क्षेत्र के ऊपर से उड़ान भरी और देखा की अंतिम छोर  के  जंगलों में प्राचीन समय के पिरामिड मौजूद थे जहाँ वानर भगवान की मूर्ति मिली। 

जिसके बारे में पच्चिम विद्वानों का मानना था कि ये मूर्ति वास्तव में वीर हनुमान से संबंध रखती हैं. इस क्षेत्र का उल्लेख रामायण के किष्किंधा कांड और युद्ध काल में भी मिलता हैं इसके अनुसार जब हनुमान जी अपने पुत्र मकरध्वज से मिलने पाताललोक की यात्रा पर थे तो उन्होंने वहां पर वहां के राजा का वध करके मकरध्वज को वहां  का राजा बना दिया और तब से वहां पर मकरध्वज की पूजा होने लगी और वो पाताललोक था भारत के विपरीत दिशा में मौजूद वो क्षेत्र जहाँ वानर भगवान की मूर्ति और उनके खोये हुए शहर की खोज हुई. यही कारण है कि मध्य और दक्षिणी अमेरिका के प्राचीन अमरीकी अपने देवताओं को लाल रंग में रंगते हैं. इसी क्षेत्र के मध्य में पेरू में वैदिक हवन कुंड का पाया जाना भी इस क्षेत्र में वैदिक प्रभाव को प्रमाणित करता हैं खोजकर्ताओं ने जब वहां जानकारी जुटाई तो पता लगा कि बहुत समय पहले वहां एक मंदिर भी था और उन्हें वहां जो भी अवशेष मिले उन्हें वाशिगंटन डी सी के नेशनल म्यूजिम ऑफ़ द अमेरिकन इंडियन में देखा जा सकता है