पद्मावती देवी का मंदिर जिसके दर्शन के बिना अधूरा है तिरुपति बालाजी के दर्शन

पद्मावती देवी का मंदिर जिसके दर्शन के बिना अधूरा है तिरुपति बालाजी के दर्शन

मां लक्ष्मी के मंदिर पूरे भारत में मौजूद है पर कई ऐसे मंदिर भी है जो अति महत्वपूर्ण है वैसे तो हर मंदिर की अपनी अलग ही मान्यता है. ऐसा ही एक मंदिर है जिसके बारे में कहा जाता है कि अगर इसके दर्शन नहीं किये तो सब अधूरा हैं. इस माँ लक्ष्मी का ये मंदिर दक्षिण भारत के त्रिरुपति के पास मौजूद हैं. इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इस खूबसूरत मंदिर का निर्माण बारहवीं शताब्दी में यादव राजा ने यहाँ कृष्ण-बलराम के खूबसूरत मंदिर का निर्माण करवाया औऱ यह गाँव फिर लोगों की नजरों में आया। इसके बाद सोलहवीं और सत्रहवी शताब्दी में यहाँ दो और मंदिर बने। इनमें से एक सुंदरा वरदराजा को समर्पित था तो दूसरा देवी पद्मावती के लिए। पौराणिक कथाओं के अनुसार देवी पद्मावती का जन्म कमल के फूल से हुआ है जो मंदिर के तालाब में खिला था।

मंदिर प्रांगण में कई देवी-देवताओं के छोटे-छोटे मंदिर निर्मित किए गए हैं। देवी पद्मावती के अलावा यहाँ कृष्ण-बलराम, सुंदराराजा स्वामी और सूर्य नारायण मंदिर भी काफी महत्वपूर्ण हैं। लेकिन प्रभु व्यंकटेश की पत्नी होने के कारण देवी पद्मावती के मंदिर को सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है। मंदिर में स्थापित देवी की मूर्ति में पद्मावती देवी को कमल के आसन पर बैठा हुआ बताया गया है, जिनके दोनों हाथों में कमल के पुष्प सुसज्जित हैं।

प्रचलित कथा 

पौराणिक कथाओं के अनुसार देवी पद्मावती का जन्म कमल के फूल से हुआ है जो मंदिर के तालाब में खिला था। मंदिर प्रांगण में कई देवी-देवताओं के छोटे-छोटे मंदिर निर्मित किए गए हैं।      
यह मंदिर अलमेलमंगापुरम के नाम से भी जाना जाता है। लोक मान्यता है कि तिरुपति बालाजी के मंदिर में माँगी मुराद तभी पूरी होती है जब श्रद्धालु बालाजी के साथ-साथ देवी पद्मावती का आशीर्वाद भी ले लें। इतिहासमाना जाता है इस तिरुचुरा गाँव में ही भगवान व्यंकटेश का प्राचीन मंदिर था। कालांतर में श्रद्धालुओं की भीड़ के सामने यह जगह छोटी पड़ने लगी इसलिए प्रभु का मंदिर तिरुपति में स्थापित किया गया और दो पूजा विधियों के अलावा सारे रीति-रिवाज तिरुपति में ही मनाए जाने लगे। इससे तिरुचुरा गाँव का महत्व कुछ कम हो गया।

कैसे जाएँ
मार्ग- तिरुपति हैदराबाद से 547 किलोमीटर दूर है और यह गाँव तिरुपति से 5 किलोमीटर दूर है। यह गाँव सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
रेलमार्ग - तिरुपति रेलवे स्टेशन से यहाँ के लिए रेल ले सकते हैं।
वायुयान- यहाँ का निकटतम हवाई अड्डा तिरुपति में है।