हनुमान जी का ऐसा मन्त्र जिसके उच्चारण भर से हो जायेंगे उनके साक्षात् दर्शन

हनुमान जी का ऐसा मन्त्र जिसके उच्चारण भर से हो जायेंगे उनके साक्षात् दर्शन

 हिन्दू धर्म में 7 चिरंजीवियों के बारे में बताया गया है, इसमें सबसे ज्यादा शक्तिशाली और पूजनीय है महाबली हनुमान जी. हमारे पुराणों और शास्त्रों के अनुसार हनुमान जी त्रेता युग से ही धरती पर है और इस युग के अंत यानि इस कलयुग के अंत तक धरती पर रहेंगे। आज बेशक हमारे वेदों और शास्त्रों का ज्ञान बेशक भुला दिया गया हैं. लेकिन फिर भी कई ज्ञान स्रोत आज भी मौजूद हैं. जो हमें ज्ञान पाने में सहायक सिद्ध हो सकते है तो हम आपको बता रहे है हनुमान जी का एक ऐसा  महामन्त्र जिसका अगर सही स्थिति और जगह पर इसका उच्चारण किया जाएँ तो आपको भी वीर बजरंगी के साक्षात् दर्शन हो जायेंगे। लेकिन इससे पहले जानना होगा इस मन्त्र का उद्देश्य और आपकी मानसिक स्थिति के बारे में इसलिए आपसे निवेदन है कि  इस मन्त्र का सही से उच्चारण कैसे होगा, दरअसल हनुमान जी त्रेता युग में अवतरित हुए , वो भगवान शिव का रूद्र अवतार थे, उनका लक्ष्य श्रीराम का साथ देना था और श्रीराम के जाने के बाद भी धरती लोक पर ही रहे. द्धापर युग में भी वो थे और कलयुग के अंत तक रहेंगे।। लेकिन आपके मन में भी ये सवाल आता ही होगा कि हनुमान जी अब नज़र क्यों नहीं आते और वो कहा है लेकिन इस बात का जवाब हम इस बात से लगा सकते है कि वो वो खुद शिव का अंश है और उनकी महाशक्तियों का एक अंश उनके अंदर भी है. जो खुद महाकाल का अंश हो वो काल पर भी नियंत्रण पा सकता हैं. काल  हमारे शास्त्रों में मृत्यु नहीं बताया गया हैं. काल समय चक्र के धागे को कहा गया है जिसमें हर जीवित और निर्जीव चीज़ समाई हुई हैं. अब आप समझ सकते है, महाकाल वो है जो इस काल चक्र का केंद्र हैं इस तरह हनुमान जी भी महाकाल का अवतार है तो वो भी इस शक्ति को अवतरित कर सकते है और अगर हनुमान जी काल के धागो को ही महसूस कर पाएं तो वो हमारे समय से ही बाहर हैं और हनुमान जी काल के धागों को ही महसूस कर पाएं तो वो हमारे  समय से ही बाहर है, यानी वो घरती लोक पर होते हुए भी इस धरती लोक पर नहीं हैं. वो समय से ही बाहर है तो वो एक ही समय में कई जगह हो सकते है तो अब बात  करते है उस मन्त्र के बारे में और वो मन्त्र है 

कालतंतु काले चरन्ति ऐरन मरणसू निर मुक्तेनम कालेतम अमरिश्म 

इस मन्त्र का अर्थ ही आपकी आँखे खोल देगा इसका अर्थ है ये समय के चाल के धागों में चलने वाले इस नाशवान को समय से बाहर ले आ ओ अजर अमर इस मन्त्र के अर्थ से जान जायेंगे कि कैसे हनुमान जी को समय से बाहर बताया गया हैं. इस मन्त्र को तब पढ़ना है जब आप धयान मुद्रा में आप अपने मस्तिक पर काबू पा लेंगे और एक पवित्र आत्मा का मानव ही इस को कर सकता हैं. यानि जैसा हम सोचते है हनुमान जी नश्वर शरीर से नहीं बल्कि अजर अमर काल में निवास करते हैं और हर समय हर जगह हैं और अगर सही मन से उनका ध्यान करते हैं  तो वो स्वयं इस समय से बाहर हमें दर्शन करते हैं. इसलिए हर हिन्दू ये माने या न माने लेकिन भय लगने पर एक ही नाम मुँह पर आता है जय हनुमान और जब ये नाम जुबां पर आता है तब डर और भय दूर हो जाता हैं क्योकि तब हमें अहसास होता है उस महाशक्ति का जो काल के जाल के हर बिंदु में हैं, जब वो महाशक्ति हमारा साथ देती हैं , तब हर बुरी शक्ति उसके पैरों में नतमस्तक हो जाती हैं