जब कलयुग में आहत हुए हनुमान और दौड़े माँ सीता के पास

जब कलयुग में आहत हुए हनुमान और दौड़े माँ सीता के पास

धार्मिक आधार के अनुसार यह त्रेता युग की बात है। जब भगवान श्री राम ने अपनी मृत्यु की घोषणा कर दी थी। यह सुनकर हनुमान जी को बहुत दुख हुआ। इसके बाद वह माता सीता के पास जाते हैं और कहते हैं 

'हे माता आपने मुझे अमर होना का वरदान तो दे दिया'। लेकिन ये बताएं अगर जब मेरे प्रभु ही धरती पर नहीं रहे रहेंगे तो मेरा यहां क्या काम । 

आप मेरा अमरता का वरदान वापस ले लिजिए।' माता सीता हनुमान जी को बहुत समझाती हैं। लेकिन वह नहीं मानते। तब माता सीता भगवान राम का स्मरण करती हैं। जब भगवान वहां आते हैं तो वह हनुमान जी को प्रेम से गले लगाते हैं और कहते हैं कि मुझे पता था तुम यह कहोगे। 

तब श्री राम कहते है 'जो भी इस धरती पर आया है उसे एक दिन जरुर जाना पड़ेगा'। मेरे जाने के बाद मेरे भक्तों के तुम्हें ही सभी संकट दूर करने है। आने वाले समय में धरती पाप के बोझ तले दब जाएगी'। प्रभु की यह बात सुनकर हनुमान जी को अमरता के इस वरदान महत्व पता चलता है।

सबकी फरियाद सुनके पूरी ये है करता,

मेरा मारुतिनंदन है देव महान..

मेरा रोम-रोम आभारी है इसका,

इसकी महिमा का मैं कैसे करूं बखान

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