सात्विक होने के कारण, सृष्टि रूप होने के कारण, तथा जगत् के साक्षी रूप होने के कारण वह ईश्वर जगत् की सृष्टि करने, न करने तथा अन्यथा करने में समर्थ है.

सात्विक होने के कारण, सृष्टि रूप होने के कारण, तथा जगत् के साक्षी रूप होने के कारण वह ईश्वर जगत् की सृष्टि करने, न करने तथा अन्यथा करने में समर्थ है.

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