पद्मनाथस्वामी  मंदिर : बड़ा खतनाक है इस मंदिर के आखिरी तहखाने का राज़

पद्मनाथस्वामी  मंदिर : बड़ा खतनाक है इस मंदिर के आखिरी तहखाने का राज़

पद्मनाथस्वामी  मंदिर भारत के केरल राज्य के तिरुनंतपुरम में स्थित भगवान विष्णु का प्रसिद्ध मंदिर हैं. इस मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु की विशाल मूर्ति हैं जो शेषनाग पर शयन मुद्रा में विराजमान हैं. मान्यता है कि इस मंदिर को छठवीं शताब्दी में त्रावणकोर के राजाओं ने बनवाया था और इस बात का जिक्र नौवीं शताब्दी में लिखे हुए कुछ ग्रंथों में आता हैं. 

इस मंदिर में छह तहखाने हैं. कहा जाता है कि त्रावणकोर के राजाओं ने बेशकीमती खजानो को  मंदिर की दीवारों और खजानों में कहीं छिपाकर रखा था. 2011 पुलिस अधिकारी खतनाक हथियारों के साथ इस मंदिर के बाहर तैनात थे. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मंदिर के ट्रस्टी सहित सात अधिकारियों की टीम ने मंदिर के दरवाज़े खोल दिए जो सदियों से बंद थे. हर दरवाज़े के पीछे बंद  कमरे में उन्हें सोने और हीरो के आभूषण और मूर्तियां मिलती गयी और वो आगे बढ़ते गए मगर जब वो आखिरी चैम्बर यानी चैम्बर बी के पास पहुंचे तो उसे वो खोलने में कामयाब नहीं हो पाएं। यहां तीन दरवाज़े थे. पहला दरवाजा लोहे से बना था, दूसरा दरवाजा मजबूत लकड़ी से बना था और फिर आखिरी दरवाजा लोहे का बना था. जो सबसे मजबूत था. इस दरवाजे पर कोई ताला भी नहीं था और न कोई कुण्डी थी. इस दरवाजे को खोलने की कोशिशें नाकाम रही. इसे खोलने गए अधिकारियों के अनुसार इस दरवाजे पर कोई ताला नहीं था और वो इसको तोडना नहीं चाहते थे, इसलिए वो वहीं से वापस आ गए. लेकिन उनके वापस लौटने का कारण कुछ ओर ही था. इस दरवाजे पर साँपों के जो चित्र बने हैं वो चेतावनी दे रहे थे कि अगर दरवाजे को खोला गया तो अंजाम बुरा होगा और वैसा हुआ भी था. 

17 जुलाई 2011 को पहले तीन कक्षों को खोलने के तीन हफ्ते बाद ही टी.पी. सुंदरराजन  यानि वो शख्स जिसने इन दरवाजों को खोलने की याचिका डालने वाले पहले बीमार पड़े और फिर उनकी मृत्यु हो गयी. अगले ही हफ्ते भक्तों की एक संस्था ने एक चेतावनी जारी कर दी कि किसी ने अगर उस आखिरी कक्ष को खोलने की हिम्मत भी की तो अंजाम बुरा होगा। कहा जाता है कि इस आखिरी दरवाजे को एक मन्त्र से बंद किया गया हैं. जिसे अष्टनाग बंध मंत्र कहा गया हैं और ये मन्त्र क्या है कोई नहीं जानता और कोई ये भी नहीं जानता कि उस कमरे में क्या रखा हैं. लेकिन उस कमरे के अंदर जो कुछ भी है एक अनोखे मन्त्र से सुरक्षित है. कहा जाता है कि उस कमरे में जाने की कोशिश करता है उसके साथ कुछ बुरा जरूर होता है और उसकी जान भी जा सकती हैं और ऐसा कुछ लोगों के साथ हुआ भी इसलिए उस तहखाने को खोलने का निर्णय सुप्रीम कोर्ट को बदलना पड़ा. 

पहले पांच तहखाने में मिले खजाने की कुल कीमत थी करीब 2 लाख करोड़ थे और उसी में 28 किलोग्राम का ऐसा बैग भी मिला जिसमें 7 देशों के राष्ट्रिय सिक्के मौजूद थे. इसके बाद केरल हाई कोर्ट के 2 पूर्व जजों का पैनल बनाया गया.  जिसने तहखाने से मिले खजाने की गिनती  थी जिसमें 3 साल लगा था. कहा जाता है कि जमीन के अंदर जो धन होता है उस पर सर्पों का अधिपत्य होता हैं. इसलिए मंत्रोच्चार करके इसको दोबारा से 2018 में खोलने की कोशिशें शुरू हुई थी. वैदिक साधना करने वाले कई साधुओं ने इसको खोलने की कोशिश की लेकिन कोई इसको खोल नहीं सका. उसके बाद ये दावा किया गया कि जो भगवान विष्णु का परम भक्त होगा वो इसके दरवाजे के आगे गरुण मन्त्र पढ़े तो दरवाजा खुल सकता हैं. 

26 दिसम्बर 2004 को केरल , तमिलनाडु और अंडमान समेत कई इलाके समुन्द्र के चपेट में आये थे.लेकिन समुन्द्र का पानी पद्मनाथस्वामी मंदिर को छू तक नहीं सकी.जबकि यह शहर समुन्द्र के किनारे पर स्थित हैं और समुन्द्र से मंदिर की दूरी सिर्फ 3 किलोमीटर हैं. त्रावणकोर राज परिवार की माने तो दरवाजे को खोलते ही महाप्रलय आ सकती हैं. इसलिए इस परिवार सहित इस शहर के लोग इस दरवाजे को खोलने के विरोध में हैं. ये भी कहा जाता है कि उस तहख़ाने के अंदर बेहद खतरनाक हथियार रखे हुए हैं. महाभारत जैसे धर्मग्रंथ में भी इस बात की चर्चा हैं कि देवताओं के पास एक से बढ़कर एक प्राचीन हथियार थे. महाभारत में ऐसे युद्ध की चर्चा है जो आज के साइंस फिक्शन फिल्मों में भी ऐसे ऐसे हथियार देखते है जिसके बारे में कभी सुना तक नहीं गया था. एक ब्रह्मास्त्र पूरे ब्रह्माण्ड को खत्म करने की शक्ति रखता था. ऐसे हथियारों को नष्ट नहीं किया जा सकता था इसलिए कहा जाता है कि मनुष्य की भलाई के खातिर उन हथियारों को ऐसे मंदिर के तहखाने में छुपा दिया था तो क्या ऐसा हो सकता है कि इस मंदिर के तहखाने चैम्बर बी के अंदर वो हथियार रखे हो जिनकी चर्चा महाभारत जैसे धर्म ग्रंथों में की गयी है या इस दरवाजे के पीछे कोई बेश कीमती खजाना होगा जो पूरे भारत की गरीबी मिटा सकता हैं.