इस मंदिर में पहुंचने के लिए गुजरना पड़ता  हैं इस सुरंग से ?

इस मंदिर में पहुंचने के लिए गुजरना पड़ता हैं इस सुरंग से ?

यह मंदिर हिमाचल प्रदेश में स्थित है। चूड़धार हिमाचल की सबसे ऊंची चोटी है जिस पर स्थित है यह मंदिर, जो भगवान शिव को समर्पित है। चूड़धार पहाड़ की चोटी पर पहुंचने के लिए लगभग 18 किलोमीटर की चढ़ाई करना पड़ती है। इस पहाड़ की चोटी पर से हिमालय की प्राकृतिक छटा देखते ही बनती है। यदि आप यहां जा रहे हैं तो सुबह-सुबह पहाड़ पर चढ़ना शुरू करना चाहिए, ताकि दोपहर से पहले मंदिर पहुंच सकें।

यह मंदिर समंदर से 11,965 फ़ीट ऊँचा हैं. यहां पर 12 से 15 फ़ीट बर्फ की सफ़ेद चादर की परत रहती हैं.  इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यहां पर 12 महीने बर्फ पड़ी रहती हैं. जानकारों के अनुसार इस मंदिर में पुजारी पंडित कृपाराम शर्मा व शिष्य काकूराम भी स्वामी की सेवा व भगवान शिरगुल महाराज की भक्ति में लीन होकर बर्फ के बीच गुजर बसर कर रहे हैं।

पुजारी के आश्रम से लेकर मंदिर तक जाने के लिए एक सुरंग बनाई गयी हैं. इस मंदिर में पीने के पानी के लिए बर्फ को पिघलाकर पीने का पानी इंतज़ाम किया जाता हैं. वहां के लोगों के अनुसार आश्रम से प्राचीन शिरगुल मंदिर तक पहुंचने के लिए नवंबर व दिसंबर महीने में ही सुरंग बनाने का काम शुरू कर दिया जाता हैं.

भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इस मंदिर में भगवान शिव एक बार यहां पर अपने गणों के साथ रुके थे और उन्होंने यहां पर विश्राम किया था. उसके बाद यहां के राजाओं ने समय समय पर इस मंदिर का निर्माण करवाते रहे हैं.