कलश स्थापना का सबसे शुभ मुहूर्त, इसकी पूजा विधि और नवरात्रि से संबंधित सभी जानकारी


कलश स्थापना का सबसे शुभ मुहूर्त, इसकी पूजा विधि और नवरात्रि से संबंधित सभी जानकारी

नवरात्रि या चैत्र नवरात्रि का प्रारंभ कल से यानी बुधवार से हो रहा है। नवरात्रि में नौ देवियों की आराधना से पूर्व घट स्थापना या कलश स्थापना किया जाता है। कलश स्थापना मुख्यत: नौ दिन तक व्रत रखने वाले लोग करते हैं, लेकिन कई जगहों पर जो लोग नवरात्रि में प्रतिपदा और अष्टमी के दिन व्रत रखते हैं, वे भी कलश स्थापना करते हैं। कलश स्थापना शुभ मुहूर्त में किया जाता है, ऐसा करना फलदायी माना जाता है। यदि आप नवरात्रि का व्रत रखने वाले हैं तो आपको कलश स्थापना की तैयारी पहले से ही कर लेनी चाहिए। आप स्वयं घर पर कलश स्थापना करना चाहते हैं तो उसकी सामग्री, मुहूर्त, विधि आदि के बारे में जान लें।

कलश स्थापना मुहूर्त:

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ 24 मार्च दिन मंगलवार को दोपहर 02 बजकर 57 मिनट पर हो रहा है, जो 25 मार्च दिन बुधवार को शाम 05 बजकर 26 मिनट  तक रहेगी। बुधवार सुबह कलश स्थापना के लिए 58 मिनट का शुभ समय प्राप्त हो रहा है। आप सुबह 06 बजकर 19 मिनट से सुबह 07 बजकर 17 मिनट के मध्य कलश स्थापना कर सकते हैं। 

कलश स्थापना या घट स्थापना विधि

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को प्रात:काल स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। फिर कलश स्थापना के लिए सामग्री पूजा स्थल पर एकत्र कर लें। अब एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं और मां दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर को स्थापित कर दें। इसके पश्चात मां दुर्गा के बाईं ओर सफेद वस्त्र पर 9 कोष्ठक नौ ग्रह के लिए बनाएं और लाल वस्त्र पर 16 कोष्ठक षौडशामृत के लिए बना लें। इतना करने के बाद कलश के गले में मौली या रक्षा सूत्र बांधें और उस पर रोली से स्वास्तिक बनाएं।

इसके पश्चात कलश स्थापना करें और पेंदी के पास गेहूं त​था चावल रख दें। फिर कलश में जल भरें तथा आम की पत्तियां डाल दें। इसके बाद एक मिट्टी के पात्र में चावल लें और उस पर नारियल के गोले में रक्षा सूत्र लपेट कर रखें। उस पात्र को कलश के मुख पर रख दें। अब एक अखंड दीपक जलाकर वहां रखें। इसके अलावा मिट्टी के पात्र में जौ को मिट्टी के साथ भर लें और उसे जल से सिंचित करें। अब उस पात्र को माता रानी की चौकी के बाईं ओर स्थापित करें।

यह कलश स्थापना की संपूर्ण विधि है। कलश स्थापना के बाद मां शैलपुत्री की विधिपूवर्क पूजा करें।