आखिर कलयुग में किस रूप में लेंगे भगवान श्री गणेश लेंगे अवतार, जाने हर युग के अवतार के बारे में

आखिर कलयुग में किस रूप में लेंगे भगवान श्री गणेश लेंगे अवतार, जाने हर युग के अवतार के बारे में

हमारे प्रिय भगवान गणेश जी को अपने भक्तों के प्रति काफी नरमदिल माना। ऐसा माना कि समस्त सिद्धियों के दाता है हम सब के भोले प्रिय भगवान गणेश जी. आज हम बताने जा रहे है कि भगवान गणेश किस युग में किस नाम से जाने जायेंगे।

सतयुग में भगवान श्रीगणेश का अवतार 

सतयुग में भगवान गणेश ने कश्यप व अदिति के यहां श्रीअवतार महोत्कट विनायक नाम से जन्म लिया। भगवान गणेश ने सात युग में इस अवतार में देवतान्तक व नरान्तक नामक राक्षसों का संहार कर धर्म की स्थापना की और अपने इस अवतार की सम्पति की थी.  सत युग में भगवान गणेश का वाहन सिंह हैं. वो दस भुजाओं वाले है और उनका तेजस्वरूप है तथा सबको वर देने वाले है. 

 त्रेता युग में भगवान श्रीगणेश का अवतार 

त्रेता युग में भगवान श्री गणेश ने उमा के गर्भ से भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन जन्म लिया और उन्हें गुणेश नाम दिया गया। इस युग में उनका वाहन मयूर हैं. इस युग में गणेश भगवान ने सिंधु नामक दैत्य का विनाश किया और ब्रह्मदेव की कन्याओं रिद्धि व सिद्धि से विवाह रचाया। 

द्धापर युग में श्रीगणेश का अवतार 

इस युग में भगवान श्री गणेश चार भुजाओं वाले और मूषक वाहन वाले हैं तथा गजानन नाम से प्रसिद्ध हैं। उनका वर्ण लाल हैं. इस युग में गणपति पुन: पार्वती के गर्भ से जन्म लिया व गणेश कहलाए। ऐसा कहा जाता है कि इन्हीं गणेश ने वेद व्यास के कहने पर महाभारत लिखी। इस युग में श्री गणेश ने सिंदुरासुर नामक राक्षस का वध करके उसके द्धारा कैद किये गए अनेक राजाओं व वीरों को मुख्त कराया गया हैं. इसी अवतार में भगवान गणेश ने वरेण्य नाम के अपने भक्त को गणेश गीता के रूप में शाश्वत तत्व ज्ञान का उपदेश दिया। ऐसा भी कहा जाता है कि वे महिष्मति वरेण्य वरेण्य के पुत्र थे। कुरुप होने के कारण उन्हें जंगल में छोड़ दिया गया था।

कलियुग में होगा भगवान श्री गणेश का ये रूप 

ऐसा माना जात्रा है कि भगवान श्री गणेश कलयुग के अंत में अवतार लेंगे और इस युग में भगवान श्री गणेश का नाम धूम्रवर्ण या शूर्पकर्ण होगा।  वो देवदत्त नाम के नीले रंग के घोड़े पर चारभुजा से युक्त होकर सवार होंगे और उनके हाथ में खड्ग होगा। वो अपनी सेना के द्धारा पापियों का नाश करेंगे और दोबारा से सतयुग की शुरुआत करेंगे। इस दौरान वे कल्कि अवतार का साथ देंगे।