जानिए आखिर क्यों रावण ने क्यों काट दिया था शनिदेव का पैर ?

जानिए आखिर क्यों रावण ने क्यों काट दिया था शनिदेव का पैर ?

शनिदेव जिसके प्रकोप से या उनके गुस्से से अच्छे अच्छे डर जाते हैं. उनको न्याय का देवता भी माना जाता है. लेकिन शायद आपको इस कथा का नहीं पता है कि जब शनि के पैर को लंकापति रावण ने काट डाला था  आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि जिस शनि की छाया से सभी डरते हैं, उस शनि के पैर को लंका नरेश रावण ने काट डाला था। इस बात को तो सभी जानते हैं कि रावण ज्योतिष शास्त्र का अच्छा ज्ञाता था। रावण की इच्छा थी कि उसका पुत्र दीर्घायु होने के साथ ही सर्व शक्तिमान हो। इसलिए जब रावण की पत्नी मंदोदरी गर्भ से थी, तो रावण ने इच्छा जताई थी कि उसका होनेवाला पुत्र ऐसे नक्षत्र में पैदा हो, जिससे कि वह महा पराक्रमी के साथ ही दीर्घायु हो।

इस बात को लेकर रावण ने सभी ग्रहों को मेघनाथ के जन्म के समय शुभ और श्रेष्ठ स्थिति में रहने का आदेश दिया था। रावण के डर से सारे ग्रह रावण के इच्छानुसार उच्च स्थिति में उपस्थित हो गए, लेकिन शनिदेव को रावण की यह बात पसंद नहीं आई। रावण जानता था कि शनिदेव उसकी बात मानकर शुभ स्थिति में विराजमान नहीं होंगे, इसलिए रावण ने अपने बल का प्रयोग करते हुए शनिदेव को भी ऐसी स्थिति में रखा, जिससे उसके होनेवाले पुत्र की उम्र लंबी हो सके। शनिदेव परिस्थितिवश उस समय रावण की मनचाही स्थिति में चले गए, लेकिन जब मेघनाद के जन्म का समय आया, तो शनिदेव ने अपनी दृष्टि वक्र कर ली। नतीजा यह हुआ कि मेघनाद अल्पायु हो गया। इस बात का पता जैसे ही रावण को चला, तो वह क्रोधित हो गया और क्रोध में आकर अपनी तलवार से शनि के पैर पर प्रहार कर उसका पैर काट दिया। यही कारण है कि तभी से शनिदेव लंगड़ा कर चलते हैं।