क्या भगवान शिव दोबारा धरती पर कब आएँगे, जाने इसका सच

क्या भगवान शिव दोबारा धरती पर कब आएँगे, जाने इसका सच

भगवान शिव जिनकी अनंत शक्ति का मुकाबला कोई नहीं कर सकता सभी पुराणों में उनकी अथाह शक्ति और उनके अवतारों के रहस्य के बारे में बताया गया हैं. लेकिन जिस तरह भविष्य पुराण में भगवान विष्णु के नौ अवतार और आने वाले कल्कि अवतार के बारे में बताया गया है उसी तरह इसमें भगवान शिव के आने वाले अवतारों के बारे में नहीं बताया गया हैं. इसलिए किसी को भी यह पता नहीं चलता कि उनका अगला अवतार धरती पर कब अवतरित होगा तो आज हम आपको आज इसी सवाल का जवाब देने वाले हैं साथ ही हम आपको उनके सभी अवतारों और स्वरूपों के बारे में भी बताने वाले हैं. लिंग पुराण में भगवान शिव के 28 अवतारों के बारे में बताया गया है पर उसमें सभी नामों का जिक्र नहीं मिलता है तो वहीं शिव पुराण में भगवान शिव के 19 अवतारों का वर्णन मिलता हैं. अगर हम पुराणों के साथ साथ वेदों का भी अध्ययन करें तो हमें पता चलेगा कि भगवान शिव अनत , निराकार है जिनका कोई रूप नहीं है. शंकर भगवान को उनका भौतिक रूप माना जाता हैं. जिन्हे खास कार्य के लिए तीन आयामी सृष्टि में आना पड़ता हैं.

 शिव पुराण में उन्ही 19 अवतार का वर्णन मिलता है ये 19 अवतार हैं. पिपलाद अवतार , नंदी अवतार , वीरभद्र अवतार , भैरव अवतार , अश्वत्थामा अवतार , गृहपति अवतार , दुर्वाशा अवतार , हनुमान अवतार , ऋषभ अवतार , कृष्ण दर्शन अवतार , भिक्षुश्वर अवतार , सुरेश्वर अवतार , कीरत अवतार , यतिनाथ अवतार , सुनत नर्तक अवतार , ब्रह्मचारी अवतार , यक्ष अवतार और अवधूत अवतार। लेकिंन भगवान विष्णु के विपरीत भगवान शिव के ये अवतार स्थायो है यानि समय समय ये अवतार इस तीन आयामी सृष्टि में आते रहते हैं. जिस तरह नंदी अवतार भगवान शंकर के साथ ही दिखाई देते हैं. वैसे ही वीरभद्र उनके रूद्र अवतार है जो समय समय पर उनका कार्य करते हैं.परशुराम और हनुमान जी तो अब भी इस धरती लोक पर विराजमान हैं. इसी के साथ उनके भविष्य में आने के संकेत कई पुराणों में मिल जाएंगे। 

अगर हम अपने पुराणों का अध्ययन करेंगे तो पायेंगे कि ब्रह्मा के एक दिन को एक कल्प कहा जाता हैं जिसमें भगवान शिव अंत में आते है और विनाश करते हैं. यही उनका कार्य हैं. क्योकि उसी के बाद दोबारा सर्जन हो पाता हैं. हमारा कलियुग भी 4 लाख 32 हज़ार साल का है जिसमें से 5000 साल बीत चुके है और भगवान विष्णु का कल्कि अवतार इस युग के अंत में जन्म लेगा और बुराई का अंत करेगा। उस समय पर भगवान शिव और हनुमान जी सबके सामने आएंगे क्योकि अमर है और इस तीन आयामी सृष्टि में अमरत्व का असली अर्थ इन चार युगों से ही है. भविष्य पुराण और ब्रह्मा पुराण के अनुसार  ये चार युग यानि एक महायुग खत्म होते है तो हर भौतिक और अमर वस्तु नष्ट हो जाते है और ये सब भगवान शिव के कारण ही होते हैं. हर पुराण में ही ये बताया गया है कि प्रलय भगवान शिव का ही एक रूप हैं जिसमें अथाह शक्ति होती है उससे कोई नहीं बच पाता। इस तरह कलयुग के अंत में भगवान शिव प्रलय लाएंगे जिसमें सभी भौतिक वस्तु नष्ट हो जाएगी। परशुराम और हनुमान जी भी इस प्रलय से अपना देह त्याग करेंगे और दोबारा भगवान शिव में ही विलीन हो जायेंगे। इस प्रलय में सिर्फ वो रहेगा जो ज्ञान से भगवान शिव को महसूस करेंगे। इसके बाद फिर से सतयुग की शुरुआत होगी और सबको भगवान शिव की प्रलयकारी शक्तियों का पता चलेगा। उसके बाद नया सर्जन होगा और भगवान विष्णु का कार्य शुरू होगा। ब्रह्मा जी से नई सृष्टि का निर्माण होगा और भगवान विष्णु उसको नई दिशा देंगे।