क्या रावण आज भी जिन्दा हैं ? जाने रावण से जुड़ें अनजान तथ्य

क्या रावण आज भी जिन्दा हैं ? जाने रावण से जुड़ें अनजान तथ्य

भारता में दशहरा बड़ी धूम धाम से मनाया जाता हैं क्योकि इस दिन भगवान राम ने लंका नरेश रावण का वध किया था लेकिन अगर  आपसे कहे कि रावण मरा नहीं अजा भी जिन्दा है और आज भी मौजूद हैं तो आप कहेंगे की आखिर ये कैसे हो सकता हैं लेकिन मानो या न मनो रावण आज भी जिन्दा है, आप जानना चाहते है वो कहा है तो हमारे इस वीडियो को पूरा देखे रामायण में माता सीता को छुड़ाने के लिए प्रभु श्रीराम और लंकापति रावण के बीच भीषण युद्ध हुआ , जिसमें रावण मारा गया, युद्ध के बाद भगवान राम ने रावण का शव विभीषण को सौंप दिया। लेकिन कोई नहीं जानता विभीषण ने रावण का अंतिम संस्कार किया भी था या नहीं क्योंकि किसी को भी रावण के अंतिम संस्कार के पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं यही वजह है कि हर कोई जानना चाहता है कि आखिर उसके शरीर का क्या हुआ. अगर हम आपसे कहे कि रावण मरा नहीं जिन्दा है और उसके शव सुरक्षित रखा है तो शायद आप विश्वास नहीं करेंगे। लेकिन आज हम आपके सबने सबूत पेश करेंगे। दरअसल श्रीलंका के इंटरनेशनल रामायण रिसर्च सेंटर और टूरिजम विभाग ने मिलकर 50 हों ऐसी जगहों को खोज निकाला है जिसका वर्णन रामायण में मिलता हैं. इन्हीं में एक जगह ऐसी है जहां रावण के होने के सबूत मिले हैं. रेगला की पहाड़ी पर है रावण रिसर्च के मुताबिक श्रीलंका के जंगलों के बीच एक ऐसी विशालकाय पहाड़ी है जहाँ रावण की गुफा हैं. ये गुफा काफी ऊंचाई पर है, कहते है यहां रावण का शव सुरक्षित रखा है शोध में इस बात को भी बताया गया है कि रावण इसी गुफा में पूजा - पाठ किया करता था. 8000 फीट ऊंचाई पर मौजूद इस गुफा में रावण की ममी रखी हुई हैं. जिस ताबुत में रावण का शव रखा हुआ है, उसकी लंबाई 18 फीट और चौड़ाई 5 फीट है। कहा जाता है कि इस ताबुत के नीचे रावण का बेशकीमती खजाना दबा हुआ है, जिसकी रखवाली एक भयंकर नाग और कई खूंखार जानवर करते हैं। घने जंगल और खूंखार जानवर होने की वजह से इस गुफा में कोई नहीं जाता। 

फिर से आएगा रावण   

लंका विजय के बाद भगवान राम ने लंका समेत रावण का शव विभीषण को सौंप दिया था लेकिन सत्ता सँभालने के नशे के कारण विभीषण ने रावण के शव को बिना दाह संस्कार के छोड़ दिया। उसके बाद राक्षसी कबीले के लोग रावण के शरीर को अपने साथ ले गए. वे शव को उसी गुफा में ले गए जहां रावण तपस्या किया करता था. राक्षसों ने विभिन्न विधियों से जीवित करने का बहुत प्रयास किया, परंतु सफलता नहीं मिली और आखिर में उन्होंने शव को ममी बनाने का फैसला किया, उन्हें उम्मीद थी कि इस तरफ वो जिन्दा हो जायेगा रिसर्च का कहना है कि रावण की ममी रेगला की गुफा में सुरक्षित रखी हैं. कुछ लोगों का ये भी मानना है कि एक दिन रावण का मृत शरीर जिन्दा हो जाएगा  

ताबूत में सुरक्षित रखा है शव 

ऐसा माना जाता है कि जिस ताबूत में रावण का शव रखा है उसको एक खास किस्म का लेप लगाया हुआ है, जिसकी वजह से हजारों सालों से वो वैसा का वैसा ही है। जैसा कि आपने सुना होगा कि मिस्र में ममी बनाने की परम्परा थी. ममी को एक खास किस्म का लेप लगाकर तैयार किया जाता था. ठीक उसी तरह रावण के शव को तैयार किया था ताकि वो सुरक्षित रह सके. यह भी कहा जाता है कि उस समय शैव सम्प्रदाय में समाधि लेने की भी परम्परा थी और रावण शैव संप्रदाय से था ऐसा कहा जाता है कि इसी ताबूत के नीचे रावण का खजाना दबा हैं. 

शक्तिशाली था रावण है 

हिन्दू मान्यता के अनुसार रावण त्रेता युग का सबसे शक्तिशाली राजा था. उसे अपनी ताकत का बहुत घमंड था जो उसको आखिर में ले डूबा। घमंड की वजह से रावण ने प्रभु राम की पत्नी सीता का हरण किया। बहुत समझाने पर भी वो नहीं माना तो रावण और राम के भी भयंकर युद्ध हुआ. रावण के बहुत शक्तिशाली सेना होने के बावजूद वो अपने अहंकार के कारण मारा गया. इस बात के प्रमाण आज भी श्रीलंका में मौजूद हैं. रावण ने जिस जगह पर माता सीता को हरण करके रखा था उसके पास एक झरना हैं जहां के चट्टानों पर अभी भी हनुमान जी के पैरों के निशान मिलते हैं 

रावण से जुड़े अन्य तथ्य 

रावण एल्ला' नाम से एक झरना है, जो एक अंडाकार चट्टान से लगभग 25 मीटर अर्थात 82 फुट की ऊंचाई से गिरता है। रावण एल्ला वॉटर फॉल घने जंगलों के बीच स्थित है। यहां सीता नाम से एक पुल भी है। इसी क्षेत्र में रावण की एक गुफा भी है जिसे रावण एल्ला गुफा के नाम से जाना जाता है। यह गुफा समुद्र की सतह से 1,370 मी. की ऊंचाई पर स्थित है। यह स्थान श्रीलंका के बांद्रावेला से 11 किलोमीटर दूर है। इस झरने को देखने के लिए लाखों लोग आज भी श्रीलंका आते हैं. ऐसे है रावण का महल भी मौजूद है जिसमें रावण अपनी पत्नी मंदोदरी के साथ रहता था उसके भी अवशेष यहां मौजूद हैं, इस महल के बारे में कहा जाता है कि इसी महल को बजरंग बली ने लंका के साथ जला दिया था. लंकादहन को रावण के विरुद्ध राम की पहली बड़ी रणनीतिक जीत माना जा सकता है, क्योंकि महाबली हनुमान के इस कौशल से वहां के सभी निवासी भयभीत होकर कहने लगे कि जब सेवक इतना शक्तिशाली है तो स्वामी कितना ताकतवर होगा और जिस राजा की प्रजा भयभीत हो जाए तो वह आधी लड़ाई तो यूं ही हार जाता है।