जाने मौनी अमावस्या की कथा

जाने मौनी अमावस्या की कथा

प्राचीन काल में देव स्वामी नाम का एक ब्राह्मण था। उसकी पत्नी का नाम धनवती था। उस ब्राह्मण के 7 पुत्र और एक पुत्री थी। इस ब्राह्मण की पुत्री बहुत ही गुणवान थी।जब ब्राह्मण ने अपने सभी पुत्रों की शादी कर ली तो उसने अपने सबसे बड़े बेटे को अपनी बेटी का वर खोजने के लिए भेजा।

तब एक ब्राह्मण ने उसकी पुत्री की जन्मकुंडली देखी और बताया यह कन्या सात वचन होते ही विधवा हो जाएगी। तब ब्राह्मण ने पूछा कि क्या इसका कोई समाधान है? तब पंडित ने कहा सोमा की पूजा करने से इसका यह दोष समाप्त हो सकता है। पंडित ने बताया कि सोमा एक धोबिन है।

अगर आप उसे प्रसन्न कर सकते हैं तो विवाह से पहले उसे यहां बुला ले। तब देवस्वामी नाम का सबसे छोटा लड़का अपनी बहन को लेकर जा रहा था तो रास्ते में एक सागर था।सागर पार करने की चिंता में दोनों एक पेड़ के नीचे बैठ गए ।

उस पेड़ पर एक गिद्ध और उसका परिवार रहता था। उस समय घोंसले में गिद्ध नहीं था। गिद्ध के बच्चे भाई बहन को देख रहे थे।शाम को गिद्ध के बच्चों की मां आ गई।उन बच्चों ने अपनी मां को बताया कि नीचे दो लोग भूखे प्यासे बैठे हैं। जब तक भी कुछ खा नहीं लेते हम भी नहीं खाएंगे।

तब गिद्ध के बच्चों की मां उनके पास गई और बोली मैंने आपकी बात को जान लिया है।इस वन में जो भी मिलेगा मैं तुम्हारे खाने के लिए वही फल फूल ले आऊंगी।सुबह होते ही मैं तुम्हें सागर पार करवा दूंगी।प्रातकाल दोनों भाई बहन गिद्ध माता की सहायता से सागर के उस पार पहुंच गई।

रोजाना सुबह उठकर वे सोमा का घर साफ कर देते थे और लीप देते थे।सोमा ने अपनी बहू से पूछा कि हमारे घर को कौन साफ करता है ?सब ने कहा हमारे सिवाय और कौन बाहर से आकर इस काम को करेगा?

किंतु सोमा को उनकी बातों पर विश्वास नहीं हुआ।एक दिन उसने यह सब जानना चाहा वह पूरी रात जागती रही तब है यह सब कुछ देख कर जान गई सोमा ने दोनों भाई बहनों से बात की तब भाई ने अपनी बहन की सारी बात बता दी सोमा ने खुश होकर उसकी बहन के इस दोष को समाप्त करने का विश्वास दिलाया।

परंतु उसके भाई ने उन्हें अपने साथ चलने के लिए कहा। उनके बार-बार कहने पर सोमा उनके साथ चली गई जाते समय सोमा ने अपने बहुओं से कहा अगर मेरे या ना होने पर किसी की मृत्यु हो जाए तो उसका शरीर नष्ट मत करना इस तरह से सोमा हम दोनों भाई बहनों के साथ कांची पुरी आ गई।

दूसरे दिन गुणवती का विवाह निश्चित हो गया। तब सात वचन होते ही उसका पति मृत्यु को प्राप्त हो गया।सोमा ने तुरंत अपने पुण्य कर्मों के द्वारा उनकी बहन गुणवती को प्रदान कर दिया। शीघ्र ही उसका पति जीवित हो गया तमसो मा उन दोनों को आशीर्वाद देकर वहां से चली गई।

उधर शोमा के घर में गुणवती को पुण्य फल देने पर उनके बेटे जमाई और पति की मृत्यु हो गई।सोमा ने वह पुण्य फल संचित करने के लिए मार्ग में भगवान विष्णु की पूजा की सोमानी अपने फल प्राप्त करने के लिए रास्ते में ही पीपल के वृक्ष की भगवान विष्णु का पूजन करके 108 परिक्रमा की ।

इस तरह से जो भी व्यक्ति इस दिन दान व्रत पुण्य इत्यादि करता है उसे पुण्य की प्राप्ति होती है।