जानिए भगवान शिव को समर्पित शोर मंदिर के बारे में

जानिए भगवान शिव को समर्पित शोर मंदिर के बारे में

भारत के तमिलनाडु राज्य के महाबलीपुरम शहर में स्थित शोर मंदिर दक्षिण भारत के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है। इस मंदिर के परिसर में तीन मंदिर मौजूद हैं.  इनमें से एक बड़ा मंदिर हैं और बाकि दो छोटे मंदिर हैं. नाइट पत्थरों से बना यह मंदिर द्रविड वास्तुकला का एक शानदार नमूना है।

इस मंदिर के दीवारों पर की गई बारीकी नक्काशी बहुत ही सुंदर हैं.यह मंदिर पांच मंजिला हैं और यह भगवान शिव को समर्पित हैं. इस मंदिर के गर्भगृह में एक शिवलिंग भी है। शोर मंदिर का मुख्य आकर्षण पांच पांडव रथ है. इसमें से चार पांडवों के नाम पर हैं लेकिन सबसे आश्चर्य इस बात का है कि इस मंदिर के पांचवें रथ को द्रौपदी रथ के नाम से जाना जाता हैं. यहां स्थित सभी रथ बेहद विशाल और एक दूसरे से अलग हैं। इनकी बनावट उस समय के कुशल कारीगरों की शिल्प कला का उदाहरण है।

शोर टेम्पल का इतिहास यह मंदिर पल्लव राजवंश के राजा नरसिंहवर्मन द्वितीय  के शासन काल में बनाया गया था। उस समय महाबलीपुरम एक व्यापारिक बंदरगाह था। मंदिर का निर्माण 700-728 ईस्वी के बीच किया गया था। पल्लव राजवंश के शासन के दौरान यह पत्थरों को काट कर बनाई गई प्रांरभिक इमारतों में से एक मानी जाती है। हाल के सालों में मंदिर के आगे समुद्र की तरह पत्थरों की एक दीवार बनाई गई है ताकि समुद्र के कटाव के कारण इस मंदिर को अधिक नुकसान ना हो। 1984 में इस मंदिर को यूनेस्को वैश्विक धरोहर स्थल घोषित कर दिया गया। वर्ष 2004 में आई सुनामी के कारण मंदिर को भारी क्षति पहुंची और इसका कुछ हिस्सा नष्ट हो गया।