जानिए डुल्या हनुमान मंदिर के बारे में

जानिए डुल्या हनुमान मंदिर के बारे में

हनुमान जी के विश्व में मानने वाले बहुत हैं,  हम आपको पुणे के गणेशपेठ में स्थापित हनुमान मंदिर के बारे में बारे में बताने जा रहे है, जो लगभग 300 साल पुराना अति भव्य और प्राचीन है। पेशवा कालीन यह ऐतिहासिक मंदिर सन् 1600 के आस-पास से पूना शहर के गणेशपेठ में स्थित है. जिसे डुल्या मारुति मंदिर के नाम से ख्याति प्राप्त है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह यहां मौजूद हनुमान जी का मूल विग्रह एक काले पत्थर से निर्मित है। यह मूर्ति पश्चिम मुखी पांच फुट ऊंची तथा तीन फुट चौड़ी है। दिर में स्थापित हनुमान जी के इस रूप को डुल्या मारुति के नाम से जाना जाता है। हनुमानजी की इस मूर्ति के पास नवग्रह स्थापित हैं।

इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि इस मूर्ति की स्थापना शिवजी महाराज के गुरु गुरु श्रीसमर्थ रामदास स्वामी ने की थी। सभा मंडप में द्वार के ठीक सामने छत से टंगा एक पीतल का घंटा है, इसके ऊपर शक संवत् 1700 अंकित है, जो मंदिर के पौराणिक होने की पुष्टि करता है। पुणे का शहरीकरण होने के कारण, आज यह मंदिर लक्ष्मी रोड और जगताप रोड को मिलाने वाले चौराहे पर स्थित है। मंदिर से 20 कदम दूर श्री सिद्धिविनायक मंदिर स्थित है।
पौराणिक इतिहास के अनुसार समर्थ रामदास का मूल नाम नारायण सूर्याजीपंत कुलकर्णी (ठोसर) था। इनका जन्म महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिसे के जंब नामक स्थान पर रामनवमी के दिन दोपहर में ब्राह्मण परिवार में शके 1533 सन 1608 में हुआ था। इनके पिता का नाम सूर्याजी पंत था। कगा जाता है कि इनके कुल में 21 पीढ़ी से सूर्योपासना की परंपरा चली आ रही थी। यहीं कारण था कि इनके पिता और खुद समर्थ रामदास जी सूर्य के बहुक बड़े उपासक थे।

लोक मान्यता के अनुसार इन्होंने ने केवल महाराष्ट्र में हनुमान में मंदिर की स्थापना की बल्कि यहां रामभक्ति के साथ-साथ हनुमान भक्ति का भी प्रचार किया। इसके साथ ही यहां अखाड़े बनवाए जिसने महाराष्ट्र के सैनिकीकरण की नींव रखी, जिसने प्राचीन समय में राज्य स्थापना को बदल के रख दिया। बता दें कि मंदिर परिसर के सभा मंडप में मुख्य द्वार के ठीक सामने छत से एक पीतल का घंटा टंगा हुआ है, जिसके ऊपर शक संवत 1700 अंकित है। इस बात के अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि ये मंदिर कितना पुराना है।