खरमास कथा जिसको सुनने से मिलती है जीवन में सफलता

खरमास कथा जिसको सुनने से मिलती है जीवन में सफलता

हिन्दू धर्म में खरमास का महीना या के दिनों में कोई भी नया काम नही किया जाता है.इस बात को मानते तो सब हैं पर इस पर शायद सबको इसके पीछे की कथा नहीं पता है इसलिए हम आपके लिए लेकर आये हैं. आइये जानते है क्या खरमास की कथा 

हिन्दू धर्मं ग्रंथों के अनुसार कहा जाता है भगवान सूर्य अपने 7 घोड़ों के रथ पर सवार होकर लगातार पृथ्वी की परिक्रमा करते रहते हैं. उन्हें कहीं पर भी रुकने की इजाजत नहीं हैं. ऐसा कहा जाता है कि उनके रुकने से जनजीवन भी रुक जायेगा। लेकिन जो घोड़े उनके रथ में जुते होते हैं, वे लगातार चलने व विश्राम न मिलने के कारण भूख-प्यास से बहुत थक जाते हैं।

उनकी इस दयनीय दशा को देखकर सूर्यदेव का मन भी द्रवित हो गया। भगवान सूर्यदेव उन्हें एक तालाब किनारे ले गए लेकिन उन्हें तभी यह भी आभास हुआ कि अगर रथ रुका तो अनर्थ हो जाएगा। लेकिन घोड़ों का सौभाग्य कहिए कि तालाब के किनारे दो खर मौजूद थे।

अब भगवान सूर्यदेव घोड़ों को पानी पीने व विश्राम देने के लिए छोड़ देते हैं और खर यानी गधों को अपने रथ में जोड़ लेते हैं। अब घोड़ा, घोड़ा होता है और गधा, गधा। रथ की गति धीमी हो जाती है फिर भी जैसे-तैसे 1 मास का चक्र पूरा होता है, तब तक घोड़ों को भी विश्राम मिल चुका होता है। इस तरह यह क्रम चलता रहता है और हर सौरवर्ष में 1 सौरमास 'खरमास' कहलाता है।

खरमास अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 16 दिसंबर के आसपास सूर्यदेव के धनु राशि में संक्रमण से शुरू होता है व 14 जनवरी को मकर राशि में संक्रमण न होने तक रहता है। इसी तरह 14 मार्च के आसपास सूर्य, मीन राशि में संक्रमित होते हैं। इस दौरान लगभग सभी मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं।