भगवान शिव का जिक्र दूसरे धर्म में भी मिलता है क्या, जाने यहाँ

भगवान शिव का जिक्र दूसरे धर्म में भी मिलता है क्या, जाने यहाँ

भगवान शिव जिन्हें हिन्दू धर्म में सृष्टि की हर वस्तु का स्रोत माना जाता है. लेकिन कई विचारक आपको ये कहते मिल जायेंगे कि उनका अस्तित्व सिर्फ हिन्दू धर्म तक ही है।  आज हम आपको लेकर आये है कि भगवान शिव का अलग अलग धर्म और  सम्रदाय में क्या स्थान हैं. जिला रायसेन मध्य प्रदेश जहाँ पर स्थित है भीम सेल का रॉक सेल्टर इन चट्टानों पर कई आकृति बनी हुई है और इनका रिसर्च करने पर पता लगता है कि ये आकृतिया 30 हज़ार साल पुरानी हैं जिन्हें यहाँ इन गुफाओं में रहने वाले मानवों ने बनाया था इन मानवों को आज स्टोन एज मेन कहा जाता है. इन्हीं आकृति में पाई गयी है भगवान शिव की कई मूर्तियां। इन आकृति में भगवान शिव ने नटराज रूप को दिखाया गया है. इन मूर्तियों से पता चलता है कि इतने साल पहले भी भगवान शिव को माना जाता था.  

वेटिकन सिटी इटली जहा पर स्थित है जॉर्जियन पितृ किशन म्यूजियम जिसमें रखा गया है 3000 हज़ार साल पुराना शिवलिंग। ये शिवलिंग ईसाई धर्म के सबसे पवित्र स्थल के नीचे पाया गया था. इंडोनेशिया जिसको दुनिया का सबसे मुस्लिम बहुल देश कहा जाता हैं. वहाँ भगवान शिव को अलग नाम से जाना जाता है. वो उन्हने बटारा गुरु कहा जाता है जो सृष्टि के रचयिता माना गया है. वहां पर उनके कई अन्य अवतारों के बारे में बताया गया हैं. यहां तक कि उनकी आकृति अलग तरह से दर्शायी गयी है. बुद्ध धर्म में भी भगवान शिव को महाकाल और शिव नाम से बताया जाता है उनका काम सृष्टि का संतुलन बिगड़ने पर विनाश लाकर उनका दोबारा निर्माण करना हैं. 

जापान में 7 लकी गॉड को माना जाता है जिसमें से एक गॉड को भगवान शिव से प्रेरित माना जाता  हैं. उनका नाम महाकाल माना  जाता हैं. उनकी तस्वीर को घर में लगाना शुभ मन जाता है. जिसे सुख और समृद्धि का प्रतीक कहा जाता हैं. बाइबल में ही इस बात का जिक्र मिलता है की ईश्वर ने वो महान बाढ़ लाई थी. जिसको जेनसिस कहा जाता है. ईश्वर ने  इंसानों के बुरे कर्मों के कारन विनाश लाया था लेकिन उससे बचने का मौका भी दिया और कुछ चुने हुए इंसान नाव बनाकर बीज लेकर बच पाएं। यही कथा हिन्दू धर्म में मत्स्य अवतार से जुडी है जिसमें भगवान शिव ने बुरे कर्मो के कारण बाढ़ लाई और भगवान  विष्णु जो कि सृष्टि के संचालक हैं. उन्होंने कुछ चुने हुए लोगों को बचाया और फिर से जीवन को बसाया। 

अगर आप इन दोनों कहानियों का मिलान करेंगे तो यही पाएंगे तो की ये वही ईश्वर है जिन्हें हम भगवान शिव कहते हैं. इसके अलावा भी  ईसाई धर्म , यहूदी धर्मं और अन्य धर्मों में यही बताया गया हैं कि अंत का समय आएगा तो ईश्वर विनाश लाएंगे और जिसने जिसने  जैसा कर्म किया होगा उसको उसके हिसाब से सज़ा मिलेगी। इसी दिन को जजमेंट डे बताया गया हैं. ऐसा ही कुछ हिन्दू धर्म में बताया गया है कि अंत में भगवान शिव प्रलय लाएंगे और हर किसी को कर्मों के हिसाब से फल मिलेगा और इस प्रलय से कोई नहीं बचेगा। अगर आप हर धर्म से मिलान करेंगे तो आपको पात्र ऐसे ही मिलेंगे जो इस तरफ इशारा करते है कि भगवान शिव के अस्तित्व को अलग अलग नामों से जाना जा रहा हैं. लेकिन सबको एक बात माननी पड़ेगी कि जब अंत आएगा तो हम किसी भी नाम से पुकारें आपका हिसाब तो उन्हीं के हाथों से होगा।