जानिए वारंगल के हजार स्तंभ मंदिर के बारे में रोचक बातें

जानिए वारंगल के हजार स्तंभ मंदिर के बारे में रोचक बातें

आज हम आपको एक अद्भुत मंदिर के बारे में बता रहे है. यह मंदिर अपनी वास्तु कला और अपनी आस्था के लिए जाना जाता है. भारत के तेलंगाना राज्य के वारंगल में  हनमाकोंडा नामक स्थान पर स्थित हैं। भगवान विष्णु, भगवान शंकर और सूर्य देव को समर्पित यह मंदिर भक्तो की आस्था का केंद्र बना हुआ हैं। थाउज़ेंड पिल्लर मंदिर एक प्राचीन मंदिर है जोकि अपनी तरह का एक अलग मंदिर और इसकी सबसे खास वजह भगवान विष्णु और शंकर के साथ ब्रह्मा जी के स्थान पर सूर्य देव की मूर्ती का होना है। मंदिर के नाम से ही पता चलता कि मंदिर में 1000 से भी अधिक खम्बे हैं।

वारंगल के हजार स्तंभ मंदिर में घूमने के लिए प्रतिदिन लगभग 1000 से भी अधिक श्रद्धालु आते हैं। हजार स्तम्भ मंदिर में तीन देवताओं की मौजूदगी की वजह से इसे त्रिकूटालयम के नाम से भी जाना जाता है।

हजार स्तम्भ मंदिर का इतिहास बहुत प्राचीन हैं जोकि काकतीय राजवंश से सम्बंधित हैं। हजार स्तंभ मंदिर का निर्माण काकतीय राजवंश के राजा रुद्र देव के आदेशानुसार 1175–1324 ईसवी में किया गया था। बता दें कि यह प्राचीन मंदिर काकतीय विश्वकर्मा स्थपतियों द्वारा स्थापत्य कौशल की आकर्षित कलाकृति हैं। हजार स्तंभ मंदिर सहित कई हिन्दू मंदिर जैसे गणपति देव, रुद्रमा देवी और प्रतापरुद्र आदि काकतीय राजवंश के संरक्षण में विकसित विकसित किए गए थे।

हजार स्तंभ मंदिर को दक्खन के आक्रमण के दौरान तुगलक वंश द्वारा क्षति पहुंचाई गई थी। इसके बाद मंदिर की मरम्मत के लिए हैदराबाद के निजाम मीर उस्मान अली खान ने 1 लाख रुपये प्रदान किए।

हजार स्तम्भ मंदिर (रुद्रेश्वर मंदिर) के बारे में एक प्राचीन कहानी से पता चलता हैं कि यह मंदिर 12 वीं शताब्दी में बनाया गया था। कहते हैं कि अनाज के लिए हनामकोंडा जाने वाले व्यापारी यही से गुजरते थे। एक बार की बात हैं जब एक व्यापारी की बेल गाड़ी खीचल में फस गई और गाड़ी निकालते वक्त यहाँ के लोगो को उस स्थान पर एक शिवलिंग मिला फिर उन्होंने वहा मंदिर की स्थापना की।