मनुष्य का जितना लौकिक कामनाओं, धन आदि के लिए तथा स्त्री आदि के प्रति प्रेम होता है उतना ही यदि वह ईश्वर से प्रेम करे, तो निसंदेह संसार से रक्षा और परमानन्द की प्राप्ति हो सकती है।

मनुष्य का जितना लौकिक कामनाओं, धन आदि के लिए तथा स्त्री आदि के प्रति प्रेम होता है उतना ही यदि वह ईश्वर से प्रेम करे, तो निसंदेह संसार से रक्षा और परमानन्द की प्राप्ति हो सकती है।

,मनुष्य का जितना लौकिक कामनाओं, धन आदि के लिए तथा स्त्री आदि के प्रति प्रेम होता है उतना ही यदि वह ईश्वर से प्रेम करे, तो निसंदेह संसार से रक्षा और परमानन्द की प्राप्ति हो सकती है।