जब एक संत ने भगवान् शिव के इसारे पर भूतो को भेजा शिवधाम

जब एक संत ने भगवान् शिव के इसारे पर भूतो को भेजा शिवधाम

श्री हरेराम बाबा राजस्थान के पाली जिले मे स्थित मुंडारा गांव मे एक खेत के पास झोंपडा बना कर निवास करते थे । एक दिन गांव के एक व्यक्ति के घर मे भूत प्रेतों का उपद्रव हो गया ।तांत्रिक, पूजा पाठ प्रयोग, ओझा सब ने प्रयास किया , बहुत प्रकार से अन्य उपाय करने पर भी समाधान नही हुआ तब वो पीड़ित व्यक्ति अपने परिवार सहित घर छोड़कर शहर की ओर चलने को तयार हुआ ।

किसी ने उस व्यक्ति से कहा की श्रीहरेराम बाबा बड़े सिद्ध महात्मा है, यदि वे इस मकान मे रह जाएं तो भूतप्रेत भाग जाएंगे । पीड़ित व्यक्ति बाबा के पास जाकर सत्य बात बोला नही । उसने कह दिया की महाराज आप यहां खेत के पास खुले मे रहते है , ठंड का समय है । हमारा मकान खाली पड़ा है , वहां हमने साफ सफाई कर रखी है और हम अब शहर जा रहे है अतः आप हमारे मकान मे ही रहो। बाबा बोले ठीक है बच्चा, वहां ठंड भी कम लगेगी । सुबह बाबा अपना कमंडलु, माला और आसान लेकर वहां पहुंचे और भजन मे बैठ गए । जैसे ही संध्याका समय हुआ, प्रेतों का उपद्रव शुरू हो गया ।

बाबा समझ गए की यहां प्रेतों का निवास है परंतु बाबा शांति से भजन मे लगे रहे । प्रेतों ने बहुत प्रकार से नाच गाना किया और शोर मचाया परंतु बाबा भजन से नही उठे । अंत मे एक चुड़ैल बाबा के सामने आकर खड़ी हो गयी । श्रीहरेराम बाबा उस स्त्री को पहचानते थे , वे बोले – अरे ! तु तो इसी गांव की थी और कुंए मे गिरकर तेरी मृत्यु हो गयी थी । ब्राह्मण परिवार की बहु होने पर भी तुझे प्रेत योनि कैसे प्राप्त हो गयी ।

उसने बताया की जन्म चाहे कितने ही ऊंचे कुल मे हो जाएं पतन्तु आचरण अच्छा न हो तो अधोगति मे जाना पड़ता है । परपुरुष के संग करने के पाप से मुझे प्रेत बनना पड़ा । मै पतिव्रत का पालन नही कर पाई और बाद मे मैंने आत्महत्या की । मै इस प्रेत योनि मे बडा कष्ट पा रही हूं , आप मेरा उद्धार कीजिये । बाबा बोले यहां और कितने भूतप्रेत है ? उस चुड़ैल ने कहा – हमारी संख्या १५ है । बाबा ने कहा ठीक है मै तुम्हारा उद्धार करने के विषय मे विचार करूँगा । अगले दिन वह फिर आयी और बोली – बाबा हमपर कृपा करो । बाबा थोड़े विनोदी स्वभाव के थे, उन्होंने कहा – बातों से उद्धार होता है क्या? उद्धार तो घी से होता है ।

हमारा घी समाप्त हो गया है – गौ का घी लाओ , सुखी रोटी भागवान को भोग लगा रहे है । चुड़ैल बोली ठीक है मै अभी घी लेकर आती हूं । गांव में एक यादव परिवार के मुखिया जी रहते थे। वो चुड़ैल जाकर उनके बहु के शरीर पर चढ़ गयी ।अब बहु अजीब अजीब हरकत करने लगी ।एक तंत्र मंत्र करने वाले ओझा को बुलाया गया और जैसे ही उसने मंत्रो का प्रयोग किया तो वह चुड़ैल बोलने लगी – छोडूंगी नही, मै इसको लेकर जाऊंगी । ओझा जी बोले – इसको छोड़ दो , नई नई शादी हुई है इसकी, इसके प्राण क्यो लेना चाहती हो ? चुड़ैल ने कहा – नही मै इसको लेकर जाऊंगी।

ओझा ने पूछा – इसको छोड़कर किस प्रकार से जाओगी ? उपाय बताओ । चुड़ैल बोली – गांव मे एक हरेराम बाबा नामक महात्मा है, उनका घी खत्म हो गया है । भगवान को सुखी रोटी का भोग लगा रहे है , उनके पास गाय का घी पहुंचाओ तो मैं इसको छोड़ कर जाऊंगी । मुखिया जी के पास ३ किलो गाय का घी था, वह तुरंत सेवक के हाथ से बाबा के पास भिजवाया । जैसे ही बाबा के पास घी पहुंचा, वह चुड़ैल वापस आ गयी ।

गांव मे यह बात फैल गयी की यदि बाबा को घी नही दिया तो हमारे घर भी भूतप्रेत भेज देगा । हर दिन बाबा के यहां पाव भर ताजा घी आने लगा । बाबा उससे संत सेवा भी करने लगे- हलवा, पुरी, चावल आदि मे घी का प्रयोग करते ।कुछ दिन बाद वह चुड़ैल बाबा के पास आकर बोली – बाबा! रोज का घी का प्रबंध तो हो गया , अब हमारा उद्धार करो । बाबा बोले – तुम्हारा उद्धार कैसे होगा ? उसने कहा की हमारे लिए यदि शिवपुराण की कथा हो तब हमारा उद्धार होगा । बाबा ने कहा की ठीक है, जब तुम्हारा उद्धार हो जाए तब हमे अनुभूति करवा कर जाना। बाबा ने पास मे रहने वाले एक ब्राह्मण जनकीप्रसाद चौबे को बुलाया और उनसे बाबा श्री गणेशदास जी के नाम एक पत्र लिखवाया । उसमे घटना लिख दी की इस कार्य के लिए शिवपुराण की कथा करनी है । बाबा गणेशदास की ने कहा की हमने कभी शिवपुराण की कथा तो कही नही परंतु श्री हरेराम बाबा की आज्ञा है तो कथा करेंगे ।

बाबा श्री गणेशदास जी मथुरा से चलकर हरेराम बाबा के पास आये और प्रातः काल महाराज जी मूल पाठ करते थे और संध्याकाल ५ घंटे कथा कहते थे । कथा के अंतिम दिन एक दिव्य तेज प्रकट हुआ, वे सभी प्रेत दिव्य शरीर धारण करके श्रीहरेराम बाबा के सामने आकर प्रणाम करके बोले – बाबा ! भगवान शिव के गणो का विमान आ गया है । उनके साथ हम लोग कैलाश को जा रहे है ।