जानिए बलराम और रेवती की प्रेम कथा और  कितनी मुश्किल से हुआ दोनों का मिलन

जानिए बलराम और रेवती की प्रेम कथा और कितनी मुश्किल से हुआ दोनों का मिलन


भगवान शिव के इस मंदिर में आज भी आता है महाभारत के समय का ये योद्धा , मंदिर में दर्शन मात्र से मिल जाता है लम्बी आयु का आशीर्वाद ये प्रेम कहानी भगवाम कृष्ण के बड़े भाई अथवा शेषनाग का अवतार माने जाने वाले बलराम और उनकी पत्नी रेवती की है। कहा जाता है कि बलराम और रेवती के बीच प्यार सतयुग में हुआ था लेकिन दोनों लोगो का मिलन द्वापरयुग में हुआ था। गर्ग संहिता के अनुसार के अनुसार रेवती पिछले जन्म में पृथ्वी के राजा मनु की बेटी थी। जिनका नाम जयोतिषमति था । एक बार मनु ने अपनी बेटी से पूछा कि उसे कैसे वर चाहिए उसने कहा कि जो इस धरती पे शक्तिशाली हो मैं उसी से विवाह करूंगी ।

तब मनु ने इंद्र से सवाल पूछा तो इन्द्र ने वायु को सबसे ताकतवर बताया लेकिन वायु ने सबसे ज्यादा ताकतवर पृथ्वी को बताया पर पृथ्वी ने सबसे ज्यादा शक्तिशाली शेषनाग को बताया। तब जयोतिषमति ने शेषनाग को पाने के लिए ब्रह्मा की तपस्या की ब्रह्मा ने उन्हें द्वापर में उन्हें बलराम से शादी करने का वर दिया। 

ज्योतिषमति ही अपने अगले जन्म में महाराजा रैवतक की पुत्री के रूप में जन्म लिया। पौराणिक कथा के अनुसार सतयुग में पृथ्वी पर रैवतक नाम के एक सम्राट हुआ करते थे। जिनकी पुत्री का नाम रेवती था। कहा जाता है कि जब रेवती विवाह योग्य हुई तो उनके पिता ने उनके विवाह के लिए पूरे पृथ्वी पर योग्य वर की तलाश शुरु की। लेकिन उनके पिता को उस समय पृथ्वी पर रेवती के समकक्ष कोई योग्य वर नही मिला । फिर रेवती के पिता जी ब्रह्मलोक गए और ब्रह्मा जी के सामने अपनी बात रखी और सब कुछ बिस्तरा में बताया। ये सब सुन कर ब्रह्मा जी मुस्कुराने लगे और बोले आप लोग पृथ्वी लोक पर वापस चल जाईये वहाँ पर श्री कृष्ण के बड़े भाई बलराम आपकी पुत्री के लिए योग्य है।

ये बात सुन कर रेवती के पिता जी बहुत खुश हुए और रेवती को वापस ले कर पृथ्वी लोक आ गये। लेकिन पृथ्वी पर पहुँच कर मनुष्य तथा अन्य जीव जन्तु छोटे आकर के देख कर आश्चर्यजनक हो गए. तब उन्होंने ने कुछ मनुष्यो से बात किया तो पता चलता है की पृथ्वी पर द्वारपर युग चल रहा है।

तब रेवती के पिता जी बलराम जी के पास गए। और ब्रह्म जी के कही बातो बलराम से कहा ये सुन कर बलराम जी मुस्कुराने लगे और महाराज से बोले जब तक आप ब्रह्मलोक से लौटे है तब तक पृथ्वी पर सतयुग नाम के दो युग गुजर गए। इस समय पर पृथ्वी पर द्वारपर युग चल रहा है। इस लिए हम लोग छोटे आकर के दिख रहे है। लेकिन रेवती के पिता अपनी पुत्री की लंबाई देख कर चिंतित हो गए। उन्होंने बलराम से कहा कि जब तक आप से रेवती लम्बी है तब तक आप दोनों का विवाह कैसे सम्भव होगा। यह सुनते ही बलराम जी ने रेवती को अपने हल से नीचे की और दबाया और रेवती छोटी हो गयी। ये देख कर रेवती के पिता जी बहुत खुश हुए तथा रेवती और बलराम को विवाह के बंधन में बाधा कर संन्यास चले.