महादेव का एक ऐसा मंदिर जहां आज तक नहीं हुई कभी पूजा, 150 साल लगे थे इसको बनने में

महादेव का एक ऐसा मंदिर जहां आज तक नहीं हुई कभी पूजा, 150 साल लगे थे इसको बनने में

भगवान शिव समस्त संसार में मौजूद हैं , फिर चाहे वो जंगल हो या पहाड़ , नदी हो या समुन्द्र। उनकी मौजूदगी का हर जगह पता चल जाता हैं. भारत में भी भोलेनाथ के बहुतया मंदिर मौजूद हैं पर ये मंदिर एक गुफा के अंदर मौजूद है जो की अपने आप में काफी अनोखी शैली में बना मंदिर हैं. आर्कियोलॉजिस्टों के अनुसार इसे कम से कम 4 हजार वर्ष पूर्व बनाया गया था। हालांकि इतिहाकार इसे 1200 वर्ष पुराना बताते हैं। यह स्थान महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में स्थित है।   

अजंता- ऐलोरा की गुफाएं विश्व भर के लोगों के लिए एक दर्शनीय स्थल के रूप में विख्यात हैं, अजंता-एलोरा की गुफाओं और मंदिरों के बारे में वैज्ञानिक कहते हैं कि ये किसी एलियंस के समूह ने बनाए हैं. इस विशालकाय अद्भुत मंदिर को देखने सभी आते हैं। इसका नाम कैलाश मंदिर है।  माना जाता है कि एलोरा की गुफाओं के अंदर नीचे एक सीक्रेट शहर है। आर्कियोलॉजिकल और जियोलॉजिस्ट की रिसर्च से यह पता चला कि ये कोई सामान्य गुफाएं नहीं हैं। यहां एक ऐसी सुरंग है, जो इसे अंडरग्राउंड शहर में ले जाती है। हालांकि इतिहासकार कहते हैं कि इस मंदिर का काम प्रथम कृष्णा के काल में पुरा हुआ। इस मंदिर को बनाने में लगभग 150 वर्ष और 7 हजार मजदूर लगे थे। शिव का यह दो मंजिला मंदिर एक ही पर्वत की चट्टानों को काटकर बनाया गया। यह मंदिर दुनियाभर में एक ही पत्थर की शिला से बनी हुई सबसे बड़ी मूर्ति के लिए भी प्रसिद्ध है।
 
भगवान शिव को समर्पित है मंदिर कैलाश मंदिर को हिमालय के कैलाश का रूप देने का भरपूर प्रयास किया गया है। शिव का यह दो मंजिला मंदिर पर्वत चट्टानों को काटकर बनाया है। यह मंदिर दुनिया भर में एक ही पत्थर की शिला से बनी हुई सबसे बड़ी मूर्ति के लिए प्रसिद्ध है।ये मंदिर 90 फीट है इस अनूठे मंदिर की ऊंचाई, 276 फीट लम्बा, 154 फीट चौड़ा है यह गुफा मंदिर। 150 साल लगे इस मंदिर के निर्माण में और दस पीढ़ियां लगीं। 7000 कामगारों ने लगातार काम करके तैयार किया है इस मंदिर को।

आर्कियोलॉजिस्टों के अनुसार इसे कम से कम 4 हजार वर्ष पूर्व बनाया गया था। हालांकि इतिहाकार इसे 1200 वर्ष पुराना बताते हैं। यह स्थान महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में स्थित है।   

40 हजार टन की चट्टानों से बनाए गए इस मंदिर को किस तकनीक से बनाया गया होगा? यह आज की आधुनिक इंजीनियरिंग के बस की बात नहीं है। 276 फीट लंबे और 154 फीट चौड़े इस मंदिर की ऊंचाई 90 फीट है। आज तक इस मंदिर में कभी पूजा किए जाने का प्रमाण नहीं मिला। कुछ लोग कहते हैं कि इसमें 40 लाख टन पत्थरों का इस्तेमाल हुआ है।

मंदिर की सबसे बड़ी बात 

इस मंदिर में आज तक कभी कोई पूजा नहीं हुई और न ही आजतक इस मंदिर में कभी पूजा किए जाने का प्रमाण नहीं मिलता। आज भी इस मंदिर में कोई पुजारी नहीं है। कोई नियमित पूजा पाठ का कोई सिलसिला नहीं चलता।