आखिर क्यों मनाई जाती है रथ अष्टमी और क्या है इसका भगवान सूर्य से संबंध

आखिर क्यों मनाई जाती है रथ अष्टमी और क्या है इसका भगवान सूर्य से संबंध

सूर्य के सबके जीवन की आधारशिला है, अगर इस पृथ्वी पर सूर्य न होता तो जीवन की कल्पना करना ही मुश्किल था. इसलिए वैदिक काल से ही सूर्य को सारे जगत का तारण हार माना जाता हैं. माघ मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी को रथ सप्तमी का पर्व मनाया जाता है. हिन्दू धर्म में ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान सूर्य का जन्म हुआ था. इसलिए इस दिन विशेष पूजा करने को शुभ माना जाता हैं.उनकी पूजा करने से आरोग्यता प्राप्त होती है इसलिये इस व्रत को आरोग्य सप्तमी भी कहते हैं। भगवान सूर्य को समर्पित यह व्रत संतान की उन्नति के लिए भी लाभप्रद है।  

रथ सप्तमी आमतौर पर वसंत पंचमी के दूसरे या तीसरे दिन मनाई जाती हैं. इसको सूर्य जयंती या माघ जयंती की नाम से भी जाना जाता है. इस दिन भगवान विष्णु के अवतार सूर्य देव की आराधना की जाती है।  रथ सप्तमी सूर्य भगवान के जन्मदिन के रूप में मनाई जाती है। इसी दिन भगवान सूर्य ने पुरे विश्व को अपनी ऊर्जा से रोशन किया था। रथ सप्तमी के दिन भगवान सूर्य की आराधना करना बहुत शुभ माना जाता है।

रथ सप्तमी का महत्व

सूर्य देव को समर्पित इस पर्व के दिन प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व पवित्र जल में स्नान करना बहुत शुभ माना जाता है। अरुणोदय में रथ सप्तमी स्नान करना इस दिन की महत्वपूर्ण परम्पराओं में से एक है। अरुणोदय, सूर्योदय से कुछ समय पूर्व होता है, जिसमें स्नान करने से व्यक्ति स्वस्थ रहता है और सभी बीमारियों से बचा रहता है। सूर्योदय के समय स्नान के बाद भगवान सूर्य को अर्घ्यदान करने से यश, सौभाग्य, ऐश्वर्य, समृ‍द्धि और वैभव का मार्ग खुलता है।